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सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है

करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है

ए शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चरचा गैर की महफ़िल में है

वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमान,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है

खैंच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद,
आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है

यूँ खड़ा मक़तल में क़ातिल कह रहा है बार-बार,
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है

वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमें ना हो खून-ए-जुनून
तूफ़ानों से क्या लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है,

हाथ जिन में हो जुनूँ कटते नही तलवार से,
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से
और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है,

है लिये हथियार दुशमन ताक में बैठा उधर,
और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है,

हम तो घर से निकले ही थे बाँधकर सर पे कफ़न,
जान हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम
जिन्दगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल में है,

दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब,
होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको ना आज
दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है,

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सड़क


चंदा मामा दूर के,
पुए पकाए बूर के,
आप खाएं थाली में,
मुन्ने को दें प्याली में,
प्याली गई टूट,
मुन्ना गया रूठ,
नयी प्याली लायेंगे,
मुन्ने को हसायेंगे,
तालियाँ बजाएंगे |

-बाल कविता (Children’s Poem)
Submitted by: देवसुत
Submitted on: Sat Jul 13 2013 19:43:18 GMT-0700 (PDT)
Category: Folklore
Language: Hindi
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पोषम पा भई पोषम पा,
डाकिये ने क्या किया,
सौ रूपए की घडी चुराई,
अब तो जेल में जाना पडेगा,
जेल की रोटी खानी पड़ेगी,
जेल का पानी पीना पड़ेगा,
अब तो जेल में जाना पड़ेगा |

– बाल कविता (Children’s Poem)
Submitted by: देवसुत
Submitted on: Sat Jul 13 2013 19:38:40 GMT-0700 (PDT)
Category: Folklore
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मछली जल की रानी है,
जीवन उसका पानी है,
हाथ लगाओ डर जाएगी,
बाहर निकालो मर जाएगी |

-बाल कविता (Children’s Poem)
Submitted by: देवसुत
Submitted on: Sat Jul 13 2013 19:36:23 GMT-0700 (PDT)
Category: Folklore
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बुरा नेता नहीं , बुरा हूँ मैं ।
जल नहीं , बिजली नहीं , भूखे सो लेता हूँ मैं ।
बुरा नेता नहीं , बुरा हूँ – मैं ।
वोट देता ही नहीं , जल बिजली और पानी पे।
वोट देता हूँ बस , मंदिर – मस्जिद और जाति पे ।
बुरा नेता नहीं , बुरा हूँ – मैं ।
तमिल – बंगला और मराठी , इनपे वोट देता हूँ मैं ।
बुरा नेता नहीं , बुरा हूँ – मैं ।
भ्रष्टाचारी , आतंकी तू नहीं , काला धन तेरा नहीं ।
वोट खरीदता तू नहीं , वोट बेचता हूँ मैं ।
इसलिए बुरा तू नहीं , बुरा हूँ – मैं ।।
-Aditya

Submitted on: Tue Oct 01 2013 03:11:07 GMT-0700 (PDT)
Category: Original
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కమ్మగా కూసింది కోయిలమ్మ సిగ్గుగానవ్వింది ముద్దుగుమ్మ

మల్లె మందారాలు సన్నజాజుల తొను
సంపెంగ విరజాజి పూల విందుల తోను
పుడమి పులకించె పండు వెన్నెలలోన
వచ్చింది వయ్యారి వాసంత లక్ష్మి ..కమ్మగా

వీణమీటినలా వేణునాద రవళిలా
మందహాసము చేసె అందాల ఆమని
కన్నె మనసున పలికె ప్రేమ రాగాలేవో
సిగ్గు దొంతర లోన మదుర భావాలేవో ..కమ్మగా

యమునా తీరాన రాస లీలల తేలు
చిలిపి కృష్ణుని తీరు తలచెనేమొ
గున్న మామిడి పైన గువ్వ జంటల వలపు
గుట్టుగా గుర్తుకి వచ్చెనేమొ ..కమ్మగా

మృదు మదుర భావాలు పిల్ల గాలుల తేలి
మూగ బాసలలొన మురిపించెనెంధుకో
ఊహలలో వరుని రూపు ఊరించెనేమొ ..కమ్మగా
-hymavati

Submitted on: Sun Jun 23 2013 04:42:44 GMT-0700 (PDT)
Category: Original
Language: Telugu
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मैंने एक तस्वीर खींची अभी
देखा कुछः लंगड़े लूले, कुछः खाते पीते,
कुछः सुखी हंस्ते, कुछः दुखी रोते।

पूछा मैंने खुद से तभी,
जब हैं ऊपर वाले के सब प्यारे,
तब क्यूं है सब ऐसे,
कुछः लंगड़े लूले, कुछः खाते पीते?
कुछः सुखी हंस्ते, कुछः दुखी रोते?

तभी मन में एक बात उठी,
और मैंने एक तस्वीर फिर खींची।
गौर से देखा तो बात कुछ हज़म हुई।

रोते बिलखते दिखे खाते पीते,
हँसी खुशी थे लंगड़े लूले।
समझ में आया तभी,
ऊपर वाले के हैं सब प्यारे,
सुख और दुख, सुखी और दुखी।

इस समझ से मैंने एक और तस्वीर फिर खींची।

-देवसुत

Submitted on: Sun Sep 22 2013 05:01:07 GMT-0700 (PDT)
Category: Original
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भगवान !
कहीं बैठा है जो तू मजे से
कभी हो समय तो जरा
नीचे आकर देख अपने बच्चों को
जिनपर थोपी गयी है तुम्हारी मर्जी
कैसे विवश हैं जीने को
क्यूँ इतनी विषमताएं
कर रखी हैं व्याप्त ?
जब तू कहता है
सभी तेरे प्यारे हैं ?
क्यूँ देता है किसी को
रोटी के लाले
क्यूँ कहीं कोठियाँ अनाजों से
भरी होती है…
कोई उड़ता है वातानुकूलित
मोटरों मे
किसी को पैरों से भी
वंचित कर देता है…
अब
या तो तू आकर अपना
सामर्थ्य सिद्ध कर
या फिर पालनहार बनने का
स्वांग त्याग दे
फिर हम भी तुझे छोड़कर
अपने-अपने हिस्से के
भगवान खुद बन जाएंगे|
-जिज्ञासु

Submitted on: Fri Sep 20 2013 13:33:01 GMT-0700 (PDT)
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तुम तो हो छोटे बचपना है तुम्हारा,
जीवनभर तुम खुश रहो यह अपसना है हमारा,
रेगिस्तान की धूप मे तुम बन जाना सरोवर,
यही तो होगी तुम्हारे आपनों की धरोहर,
सूरत तुम्हारी होगी सारे जग से मनोहर,
बसने आए तुम्हारे साथ जगत का ईश्वर,
कुछ नहीं माँगा प्रभु से करता हू अरज,
सब हঁसते रहे हঁसाते रहे यही मेरा अरमान,
कोई न रूठे , साथ न छूटे हঁसाते रहो हमेशा,
बहुत दूर से भी याद करेगा तुम्हें, तुम्हारा “विवेक” |

-आ়जाद

Submitted on: Wed Aug 07 2013 05:32:46 GMT-0700 (PDT)
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