Category: Hindi



मैं तन्हा प्रिये जागा सारी रात
कभी इस करवट कभी उस करवट
बिस्तर पर पड़ती रही अकेलेपन की सलवट
हीर हिर्दय सुलगता रहा
अकेलेपन का नस्तर चुभता रहा
याद तेरी सताती रही पल पल
आँखों से झरना बहा कई बार कलकल

दुःख बड़ा है ये बिरह का
पत्नी होकर भी बिना किसी कारन दूर रहती हो
ये वजह है कलह का

मेरे प्रेम में सम्पूर्णता नही थी
या शादी के मन्त्रों में रही कमी
कारन कुछ भी हो पर प्रिये
मैं आज भी जागा सारी रात
कभी इस करवट कभी उस करवट

Amar

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Submitted by: Amar
Submitted on: Wed Feb 17 2016 11:17:11 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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जब जनम पार हो जाए तो बदन राख कर बहा देना
आंसुओं से नहीं , नदी में डाल देना ।
Janaab

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Submitted by: Janaab
Submitted on: Sat Aug 15 2015 15:33:37 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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हमें कितना प्रेम दिया जब हम छोटे थे
तब नही थी आपको मुझसे आस
आज क्योँ बदल गए आप
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास

क्या रिश्तों का आँगन ऐसे ही सिमटेगा
अपनों का दामन बस धन में लिपटेगा
क्योँ नही रहा आपको अपनेपन का एहसास
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास

क्या धन के लिए मैं कहीं डाका डालूं
कोई घोटाला कर डालूं
अपने को बेच खुद नई नजर में बना डालूं अपना उपहास
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास

धन से ख़ुशी नही मिलती अप्पा
संतोष बड़ा धन है
सबसे बड़ा धन है आस
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास
Amar

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Submitted by: Amar
Submitted on: Wed Feb 17 2016 10:59:34 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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क्या मैं आपको जानता हूँ ?

मैंने आपको कहीँ देखा है ।

एक बार नहीं कई बार,
शायद …

लेकिन आप ने मुझे अभी तक नहीं देखा ,
देखते भी तो मुझे पहचानते नहीं
शायद …

एक बार एक मोड़ पे ,
मैं खड़ा इंतज़ार कर रहा था जब ,
एक तेज़ ट्रक में बैठे आप ,
मेरे पास से निकले थे ।

मुझे याद है ,
आप ही थे ,
शायद …

कई बरस बाद फिर ,
एक बरसाती रात में ,
बिजली के खम्बे के पास,
से गुज़रा था मैं जब,
आप खड़े थे बिन भीगे ।

मुझे याद है ,
आप ही थे ,
शायद …

अभी बस कुछ दिनों पहले फिर,
मुझे स्ट्रेचर पर डॉक्टर ले जा रहे थे जब,
आपरेशन थिएटर में बैठे थे आप ।

मुझे याद है ,
आप ही थे ,
शायद …

मेरी यादें अब धुंधली ,
आँखों की रौशनी बुझती ,
बे-आवाज़ कमरे में,
आप अब मुझसे मिलने आए हैं ?

क्या मैं आपको जानता हूँ ?
हरेकृष्ण आचार्य

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Submitted by: हरेकृष्ण आचार्य
Submitted on: Fri Sep 18 2015 22:02:53 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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मिलते रहोगे गर मुझसे
पलकों पे आंसू तो आएँगे ही ,
अब तो जनम पार हो गया और बदन राख ,
सांस भी लोगे तो मैं ही मिलूंगा ।
Janaab

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Submitted by: Janaab
Submitted on: Sat Aug 15 2015 15:31:34 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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नमक मिर्च लगाना ।
English Translation: To apply salt and chilli.
Meaning: To exaggerate

घाट घाट का पानी पीना ।
English Translation: Drinking water from every river.
Meaning: Becoming experienced.

गुड़ गोबर करना ।
English Translation: Given jaggery, make it dung.
Meaning: To make all good effort come to nought.

1. मस्का लगाना ।
2. मक्खन लगाना ।
English Translation: Apply butter to a person.
Meaning: To praise a person to gain his confidence.

चक्की पीसना ।
English Translation: Run the mill.
Meaning: Work hard as in punishment.

Tags: Namak mirch lagana, ghaat ghaat ka paani peena, gud gobar karna, maska lagaana, makkhan lagaana, chakki peesna

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Submitted on: Sun Jun 14 2015 17:45:33 GMT+0530 (IST)
Category: Ancient Wisdom
Language: हिन्दी/Hindi

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जाती ना पूछो साधु की; पूछ लीजिए ज्ञान |
English Translation: Do not ask a saint his class; ask him a question.

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Submitted by: –
Submitted on: Sun Jun 14 2015 17:01:45 GMT+0530 (IST)
Category: Ancient Wisdom
Language: हिन्दी/Hindi

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बूढा बन्दर छलाङ्ग ही मारे ।
English Translation: Old Monkey can only jump.
English Equivalent: Old habits die hard.

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Submitted by: देवसुत
Submitted on: Tue May 26 2015 17:04:50 GMT+0530 (IST)
Category: Ancient Wisdom
Language: हिन्दी/Hindi

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मैं भारत

कई आये तूफ़ान , कई बवंडर ,
कई आए बाढ़ , कई भूचाल ,
कितने मरे, कितने बचे,
कितने गिरे, कितने उठे,
कितने गए, कितने आए ,
पर मैंने पीछे मुड़ कब देखा ?

कई आये राम, कई रावण,
कई आये बुद्ध , कई चंगेज़,
कितने मिले, कितने बिछड़े ,
कितने हँसे , कितने रोए ,
कितने ज़िंदा, कितने मुर्दा,
पर मैंने पीछे मुड़ कब देखा ?

कहीं पूजा, कहीं जिहाद,
कहीं यज्ञ, कहीं आतंक,
कितने सुखी, कितने दुखी,
कितने शांत, कितने आतंकी,
कितने सत्य, कितने भ्रम,
पर मैंने पीछे मुड़ कब देखा ?

कहीं प्यार , कहीं बम ,
कहीं जश्न, कहीं सर कलम,
कितने राजा, कितनी प्रजा,
कितने राज्य, कितनी परंपरा ,
कितने राष्ट्र , कितनी जनता ,
पर मैंने पीछे मुड़ कब देखा ?

कितने किले, कितने दरबार,
कितने चोर, कितने मक्कार,
कितने बस बैठे-बैठे आग,

कितने मंत्री, कितने तंत्री ,
कितने वीर, कितने वीरगति,
कितने बस देखते – देखते बलि ,

कितने अशोक, कितने अकबर,
कितने अंग्रेज़ , कितने औरंगज़ेब ,
कितनो ने किया यहाँ हेर – फेर ,
पर मैंने पीछे मुड़ कब देखा ?

पर मैंने पीछे मुड़ कब देखा ।

-हरेकृष्ण आचार्य
21:15, 19/07/2006

First penned in the English Script as below. Lost and found after 8 years thanks to Marisha’s page in Geocities (http://www.geocities.ws/hansteraho/literary/kris_mudke.htm) and indexed by Google.
I always wanted to write it in Hindi Script. Thanks to A Billion Stories to make it so simple. And Marisha’s comment below on the poem:

– another beautiful composition in hindi about the paths tread by the indomitable spirit of India….from Krishna after a long hiatus. –
Marisha

main BHAARAT.

kai aaye toofaan, kai bawandar,
kai aaye baadh, kai bhoochaal,
kitne mare, kitne bache,
kitne gire, kitne uthe,
kitne gaye, kitne aaye,
par maine peeche mud kab dekha?

kai aaye raam, kai raavan,
kai aaye buddh, kai changez,
kitne mile, kitne bichde,
kitne hasse, kitne roye,
kitne zinda, kitne murda,
par maine peeche mud kab dekha?

kahin pooja, kahin jihad,
kahin yagya, kahin aatank,
kitne sukhi, kitne dukhi,
kitne shaant, kitne aatanki,
kitne satya, kitne bhram,
par maine peeche mud kab dekha?

kahin pyar, kahin bum,
kahin jashn, kahin sar kalam,
kitne raja, kitni praja,
kitne rajya, kitni parampara,
kitne rashtra, kitni janata,
par maine peeche mud kab dekha?

kitne kile, kitne darbaar,
kitne chor, kitne makkaar,
kitne bas baithe-baithe aaag,

kitne mantri, kitne tantri,
kitne veer, kitne veergati,
kitne bas dekhte-dekhte bali,

kitne ashok, kitne akbar,
kitne angrez, kitne aurangzeb,
kitno ne kiya yahaan her-pher.
par maine peeche mud kab dekha?

MAINE PEECHE MUD KAB DEKHA?

-B. H. Acharya
21:15, 19/07/2006

हरेकृष्ण आचार्य

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Submitted by: हरेकृष्ण आचार्य
Submitted on: Sat Dec 13 2014 20:39:32 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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आस -Aashirwad


कुछ ख्वाब अधूरे से
कोई प्यास अधूरी सी
इन आँखों में क्यूँ हैं
एक आस अधूरी सी

राह पर जमी रही ये नज़रें
इंतज़ार की इन्तहा होने को आई
फिर भी ना माने मन बावरा
तकता रहा किसी के दीदार मे
ख्वाइश थी मुकम्मल जहाँ बसाने की
रिश्तो के बाज़ार मे

दिन थे वो सुहानी थी रातें भी खुशनुमा
थे हज़ारों परवाने रोशन मोहब्बत के नाम पर
मेरे दिल का मिजाज़ भी था आशिकाना
कम्बख़त था मेरा और धड़कता था किसी और के नाम से
इश्क के सफ़र में हमसफ़र दिलनशी था
दिलबर की अदाओं का आलम हसीं था

फिर शाम घिर आई हैं
फिर यादों का वो घेरा हैं
तेरे निशाँ की तलाश में
खोया चैन-ओ-सुकून मेरा हैं

इस शब् के सियाह साये में
खामोशी हैं, वीरानी हैं
तेरे बिना अधूरी, बिन तेरे अनकही
कुछ ऐसी मेरी कहानी हैं |
Aashirwad

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Submitted by: Aashirwad
Submitted on: Mon Feb 17 2014 00:18:27 GMT+0530 (IST)
Category: Original
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