Category: Hindi



प्यार की बातें बोलकर मुझे बहलाओ मत ,
अभी बोलो तुम आओगे कब ?
बच्चे रोते हैं, पर पूछते नहीं हैं तुमको ,
हँसकर मैं भी जवाब नहीं देती उनको ।
तुम्हारे पैसों से खाना बनता है, ख़ुशी नहीं ,
बिन बाप के बच्चे, बढ़ेंगे कैसे? पता नहीं !
मुझे पैसों की भरमार नहीं , ख़ुशी चाहिए ,
तुम्हारा हाथ, तुम्हारा साथ चाहिए ।
पैसे अब काफी हैं ज़िन्दगी काटने के लिए ,
बच्चों की देख-रेख और पढ़ाई के लिए ।
बाकी जो बचा, वह कुछ कर लेंगे इधर-उधर ,
अभी बोलो, तुम आओगे कब ?
-देवसुत

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Submitted by: देवसुत
Submitted on: Mon Sep 05 2016 00:00:00 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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सड़क


पेट खाली पर सोने का तकिया ।
-हरेकृष्ण आचार्य

English Translation of Hindi Quote:
Stomach is empty but the pillow is of Gold.

Meaning:
Defines a person who cuts down on essentials but splurges on luxury.
हरेकृष्ण आचार्य

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Submitted by: हरेकृष्ण आचार्य
Submitted on: Thu Mar 17 2016 11:52:18 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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ह्रदय का क्रंदन या प्रिये का वंदन
या करूँ शंखनाद
अंजुली भर भर अनादर मैं पी चूका
जहर तेज था मैं जी चूका

प्रिये अब तो समझ जाओ
अप्रिय बोल से जी ना जलाओ
मैं जो जला तो तुम्हे क्या सुख दे पाउँगा ?
अंदर के अनल में जल अंदर राख बन जाऊंगा

जो जल जायेगा मन
तन का मोल ना रह जायेगा
तन दिखेगा सुन्दर बस एक
खोल ही तो रह जाएगा

हम नही मिले लड़ने के लिए
अभी तो तवा पर आरजू भी ना हुई
पास रहकर प्रेम की की एक ग़ुफ़्तगू ना हुई

कभी आओ प्रिये अपनी मर्जी से
साथ रहकर देखो की इन झगड़ों में
कितना रस है ,क्योँ दूर हो
खुदगर्जी से।
Amar

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Submitted by: Amar
Submitted on: Wed Feb 17 2016 13:55:48 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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क्यों हैं यह रास्ते संकरे ?
क्यों हैं यहाँ बाबू अंधे ?
क्यों हैं यहाँ लोग प्यासे मरते ?
जब बाँध हैं पानी से फूटते ?

कहते हैं शहर में पानी कम है
पर फिर गगन-चुम्भी बनाते क्यों हैं ?
ढक देते हैं क्यों ज़मीं को सीमेंट से?
तालाबों को क्यों भर देते ?

पानी कम नहीं स्वार्थ ज़्यादा है
तालाब से ज़्यादा ज़मीन में फायदा है
फ्लैट बनाएंगे और पानी बेचेंगे
और हम?
फ्लैट में रहेंगे और प्यास से मरेंगे ।

-हरेकृष्ण आचार्य
Penned: 15-6-2010
हरेकृष्ण आचार्य

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Submitted by: हरेकृष्ण आचार्य
Submitted on: Sat Mar 05 2016 09:02:50 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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मैं तन्हा प्रिये जागा सारी रात
कभी इस करवट कभी उस करवट
बिस्तर पर पड़ती रही अकेलेपन की सलवट
हीर हिर्दय सुलगता रहा
अकेलेपन का नस्तर चुभता रहा
याद तेरी सताती रही पल पल
आँखों से झरना बहा कई बार कलकल

दुःख बड़ा है ये बिरह का
पत्नी होकर भी बिना किसी कारन दूर रहती हो
ये वजह है कलह का

मेरे प्रेम में सम्पूर्णता नही थी
या शादी के मन्त्रों में रही कमी
कारन कुछ भी हो पर प्रिये
मैं आज भी जागा सारी रात
कभी इस करवट कभी उस करवट

Amar

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Submitted by: Amar
Submitted on: Wed Feb 17 2016 11:17:11 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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जब जनम पार हो जाए तो बदन राख कर बहा देना
आंसुओं से नहीं , नदी में डाल देना ।
Janaab

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Submitted by: Janaab
Submitted on: Sat Aug 15 2015 15:33:37 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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हमें कितना प्रेम दिया जब हम छोटे थे
तब नही थी आपको मुझसे आस
आज क्योँ बदल गए आप
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास

क्या रिश्तों का आँगन ऐसे ही सिमटेगा
अपनों का दामन बस धन में लिपटेगा
क्योँ नही रहा आपको अपनेपन का एहसास
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास

क्या धन के लिए मैं कहीं डाका डालूं
कोई घोटाला कर डालूं
अपने को बेच खुद नई नजर में बना डालूं अपना उपहास
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास

धन से ख़ुशी नही मिलती अप्पा
संतोष बड़ा धन है
सबसे बड़ा धन है आस
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास
Amar

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Submitted by: Amar
Submitted on: Wed Feb 17 2016 10:59:34 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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क्या मैं आपको जानता हूँ ?

मैंने आपको कहीँ देखा है ।

एक बार नहीं कई बार,
शायद …

लेकिन आप ने मुझे अभी तक नहीं देखा ,
देखते भी तो मुझे पहचानते नहीं
शायद …

एक बार एक मोड़ पे ,
मैं खड़ा इंतज़ार कर रहा था जब ,
एक तेज़ ट्रक में बैठे आप ,
मेरे पास से निकले थे ।

मुझे याद है ,
आप ही थे ,
शायद …

कई बरस बाद फिर ,
एक बरसाती रात में ,
बिजली के खम्बे के पास,
से गुज़रा था मैं जब,
आप खड़े थे बिन भीगे ।

मुझे याद है ,
आप ही थे ,
शायद …

अभी बस कुछ दिनों पहले फिर,
मुझे स्ट्रेचर पर डॉक्टर ले जा रहे थे जब,
आपरेशन थिएटर में बैठे थे आप ।

मुझे याद है ,
आप ही थे ,
शायद …

मेरी यादें अब धुंधली ,
आँखों की रौशनी बुझती ,
बे-आवाज़ कमरे में,
आप अब मुझसे मिलने आए हैं ?

क्या मैं आपको जानता हूँ ?
हरेकृष्ण आचार्य

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Submitted by: हरेकृष्ण आचार्य
Submitted on: Fri Sep 18 2015 22:02:53 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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मिलते रहोगे गर मुझसे
पलकों पे आंसू तो आएँगे ही ,
अब तो जनम पार हो गया और बदन राख ,
सांस भी लोगे तो मैं ही मिलूंगा ।
Janaab

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Submitted by: Janaab
Submitted on: Sat Aug 15 2015 15:31:34 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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