Category Archives: Hindi

दूध में दरार पड़ गई -Atal Behari Vajpayee


दूध में दरार पड़ गई
खून क्यों सफेद हो गया?
भेद में अभेद खो गया |
बंट गये शहीद, गीत कट गए,
कलेजे में कटार दड़ गई |
दूध में दरार पड़ गई |
खेतों में बारूदी गंध,
टूट गये नानक के छंद
सतलुज सहम उठी, व्यथित सी बितस्ता है |
वसंत से बहार झड़ गई
दूध में दरार पड़ गई |
अपनी ही छाया से बैर,
गले लगने लगे हैं ग़ैर,
ख़ुदकुशी का रास्ता, तुम्हें वतन का वास्ता |
बात बनाएं, बिगड़ गई |
दूध में दरार पड़ गई |

-श्री अटल बिहारी वाजपेयी

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गीत नया गाता हूं -Atal Behari Vajpayee


बेनकाब चेहरे हैं, दाग बड़े गहरे हैं
टूटता तिलिस्म आज सच से भय खाता हूं
गीत नहीं गाता हूं
लगी कुछ ऐसी नज़र बिखरा शीशे सा शहर
अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूं
गीत नहीं गाता हूं
पीठ मे छुरी सा चांद, राहू गया रेखा फांद
मुक्ति के क्षणों में बार बार बंध जाता हूं
गीत नहीं गाता हूं
गीत नया गाता हूं
टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर
पत्थर की छाती मे उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात कोयल की कुहुक रात
प्राची मे अरुणिम की रेख देख पता हूं
गीत नया गाता हूं
टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी
अन्तर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी
हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा,
काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं
गीत नया गाता हूं |

–श्री अटल बिहारी वाजपेयी

<hr>

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मुझे इतनी ऊँचाई कभी मत देना -Atal Behari Vajpayee


मुझे इतनी ऊँचाई ,
कभी मत देना ,
गैरों को गले न लगा सकूं ,
इतनी रुखाई,
कभी मत देना |
-श्री अटल बिहारी वाजपेयी

Tags: mujhe itni oonchaai kabhi mat dena , Atal Behari Vajpayee, Poems

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मौत से ठन गई -Atal Behari Vajpayee


मौत से ठन गयी !
जूझने का मेरा इरादा न था,
मोड़ पर मुड़ेंगे इसका वादा न था ,
रास्ता रोक कर खड़ी हो गयी ,
यूँ लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गयी ।
मौत की उम्र क्या है?
दो पल वह नहीं,
ज़िन्दगी सिलसिला,
आज कल की नहीं |
मैं जी भर जिया ,
मैं मन से मरुँ,
लौटकर आऊँगा,
कूच से क्यों डरूं ?
मौत से बेखबर,
ज़िन्दगी का सफर,
शाम हर सुरमई,
रात बंसी का स्वर |
बात ऐसी नहीं की कोई गम ही नहीं,
दर्द अपने-पराये कुछ कम भी नहीं ,
प्यार इतना परायों से मुझको मिला,
न अपनों से बाकी है कोई गिला ,
हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये,
आँधियों में जलाये हैं बुझते दीये,
आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान हैं,
नाव भंवरों की बाहों मैं मेहमान है,
पार पाने का कायम मगर हौंसला,
देख तेवर का, तौरियाँ तन गयी ,
मौत से ठन गयी !

-श्री अटल बिहारी वाजपेयी

Tags: maut se than gayi , Atal Behari Vajpayee, Poems

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आओ फिर से दिया जलाएं -Atal Behari Vajpayee


आओ फिर से दिया जलाएँ
भरी दुपहरी में अंधियारा
सूरज परछाई से हारा
अंतरतम का नेह निचोड़ें-
बुझी हुई बाती सुलगाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ
हम पड़ाव को समझे मंज़िल
लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल
वतर्मान के मोहजाल में-
आने वाला कल न भुलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ।
आहुति बाकी यज्ञ अधूरा
अपनों के विघ्नों ने घेरा
अंतिम जय का वज़्र बनाने-
नव दधीचि हड्डियां गलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ|

-श्री अटल बिहारी वाजपेयी

Tags: aao phir se diya jalaaen , Atal Behari Vajpayee, Poems

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न नौ मन तेल होगा… (HIndi Proverbs) -Janaab


न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी |
अर्थात: कारण समाप्त हो जाने पर परिणाम स्वतः ही समाप्त हो जायेंगे |

नाच ना जाने आँगन टेढ़ा |
अर्थात: स्वंय की अकुशलता को दूसरों पर थोपना |

अन्धों में काणा राजा |
अर्थात: मूर्खों में कम विद्वान भी श्रेष्ठ माना जाता है |

घर का भेदी लंका ढाए |
अर्थात: राज़दार ही विनाश का कारण बनता है |

गरजते बादल बरसते नहीं |
अर्थात: शक्तिहीन व्यक्ति निरर्थक चिल्लाता है | वह कुछ कर नहीं सकता है |

अपने पैरों पर खड़ा होना |
अर्थात: स्वालंबी होना
वाक्य: युवकों को अपने पैरों पर खड़े होने पर ही विवाह करना चाहिए ।

अक्ल का दुश्मन |
अर्थात: मूर्ख
वाक्य: लगता है आजकल तुम अक्ल के दुश्मन हो गए हो ।

अपना उल्लू सीधा करना |
अर्थात: मतलब निकालना
वाक्य: आजकल के नेता अपना उल्लू सीधा करने के लिए ही लोगों को भड़काते है ।

आँखे खुलना |
अर्थात: सचेत होना
वाक्य: ठोकर खाने के बाद ही बहुत से लोगों की आँखे खुलती है ।

आँखे दिखाना
अर्थात: क्रोध करना
वाक्य: मैंने सच बातें कह दी , तो वह मुझे आँख दिखाने लगा ।

आसमान से बातें करना
अर्थात: बहुत ऊँचा होना
वाक्य: आजकल इमारते आसमान से बातें करती है ।

ईंट से ईंट बजाना
अर्थात: पूरी तरह नष्ट करना
वाक्य: राम, अपने शत्रु की ईंट से ईंट बजा दे।

ईंट का जबाब पत्थर से देना |
अर्थात: जबरदस्त बदला लेना
वाक्य: भारत अपने दुश्मनों को ईंट का जबाब पत्थर से देगा ।

ईद का चाँद होना |
अर्थात: बहुत दिनों बाद दिखाई देना
वाक्य: राम, तुम ईद के चाँद हो गए हो ।

उड़ती चिड़िया पहचानना |
अर्थात: रहस्य की बात दूर से जान लेना |
वाक्य: वह इतना अनुभवी है कि उसे उड़ती चिड़िया पहचानने में देर नहीं लगती ।

उन्नीस बीस का अंतर होना |
अर्थात: बहुत कम अंतर होना |
वाक्य: राम और श्याम, दोनों में उन्नीस बीस का ही अंतर है ।

Photo By: –
Submitted by: Janaab
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Category: Folklore
Language: हिन्दी/Hindi

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जीवन – यज्ञ है -देवसुत


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जीवन – यज्ञ है
जब ,
मैं – नहीं है
और सब – मैं है
तब ,
जीवन – यज्ञ है |

कैसे , कब , क्या, कहाँ – सब ,
सीखो जब
और
“मैंने किया” ,
मत बोलो
तब ,
जीवन – यज्ञ है |

इस राह पर पहला कदम
जब बोलो – सब साथ चलो ,
और चलो – सबको साथ
लेकर ,
खींचकर ,
पसीना तर हो जाओ ,
पर बोलो – मैं नहीं ,
तब ,
पथ तुम्हारा यज्ञ है ,
तब ,
जीवन – यज्ञ है |

सबके आंसू पोंछो ,
पर बोलो – मैं नहीं ,
सबकी भूख मिटाओ ,
पर बोलो – मैं नहीं ,
तब
जीवन – यज्ञ है |

भलों की करो भलाई ,
पर बोलो – मैं नहीं ,
बुरों की करो बुराई ,
और बोलो – सिर्फ – मैं ,
तब
जीवन – यज्ञ है |

-देवसुत

Photo By: Unknown
Submitted by: देवसुत
Submitted on: Mon Nov 19 2018 23:27:00 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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नमक मिर्च … (Hindi Proverbs) –


कलेजे का टुकड़ा ।
English Translation of Hindi Proverb: A piece of my heart
English equivalent proverb: Apple of my eye.

कलेजा मुँह में आना ।
English Translation of Hindi Proverb: Heart in mouth (signifying fear or anxiety).
English equivalent proverb: none

दो वक़्त की रोटी ।
English Translation of Hindi Proverb: 2 times a day, bread.
English equivalent proverb: Living hand to mouth.

पेट में चूहे कूदना ।
English Translation of Hindi Proverb: Mice jumping in the stomach (signifying hunger).
English Equivalent Proverb: none

पापड़ बेलना ।
English Translation of Hindi Proverb: Roll a “Papad” (no english word). Papad is made when dough is rolled very thin.
English Equivalent Proverb: none. But it signifies “working hard”

अपनी खिचड़ी अलग पकाना ।
English Translation of Hindi Proverb: Cooking ones own concoction separately.
English Equivalent Proverb: none

दूध की नदियाँ बहाना ।
English Translation of Hindi Proverb: Throwing so much milk as in a river. Signifies –
Excess.
English Equivalent proverb: none

आटे दाल का भाव पता लगना ।
English Translation of Hindi Proverb: To find out living costs.
English Equivalent proverb: none

आम के आम, गुठलियों के दाम ।
English Translation of Hindi Proverb: Not only mangoes, even the mango seeds gave returns.
English Equivalent proverb: none

कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली ।
English Translation of Hindi Proverb: What is the level of King Bhoj and where comes from Gangu the vegetable oil maker. Signifying the levels of social strata between two people.
English Equivalent proverb: none

नाक में दम करना ।
English Translation of Hindi Proverb: To create a pain in the nose.
English equivalent proverb: A pain in the ass.

सर सलामत तो पगड़ी हज़ार ।
English Translation of Hindi Proverb: If the head is fine, a thousand turbans can be worn. Signifies the primacy of “survival”.
English equivalent proverb: Bend now to live another day. (Originally created by the author – all rights reserved)

एक हाथ से ताली नहीं बजती ।
English Translation of Hindi Proverb: One cannot clap with one hand.
English equivalent proverb: It takes two to tango.

ओखली में सर दिया तो मूसलों से क्या डरना ।
English Translation of Hindi Proverb: If the head has been put in the pounder (Okhli) voluntarily, then why fear the pounding.
English equivalent proverb: none

अंत भला तो सब भला ।
English Translation of Hindi Proverb: If the end is good, then all is good.
English equivalent proverb: none

ऊंची दूकान फीका पकवान ।
English Translation of Hindi Proverb: High shop, bad food. Signifying high cost as well as low quality.
English Equivalent proverb: none

राम राम जपना , पराया माल अपना ।
English Translation of Hindi Proverb: Take the name of God, but be a thief.
English equivalent proverb: Nearer the church, farther from God.

येड़ा बन के पेड़ा खाना ।
English Translation of Hindi Proverb: Become a fool and eat the pie.
English equivalent proverb: Act fooling if it means profit.

नाक काटना ।
English Translation of Hindi Proverb: cut the nose. Signifying: to insult.
English equivalent proverb: none

नाक पे मक्खी न बैठने देना ।
English Translation of Hindi Proverb: Not even to allow a fly to sit on the nose. Signifying to take utmost care.
English equivalent proverb: Take utmost care.

नाक रगड़ना ।
English Translation of Hindi Proverb: Rub the nose
English equivalent proverb: none. But it signifies ” to make to do the hard work”

नाक रखना ।
English Translation of Hindi Proverb: Keep the nose.
English equivalent proverb: none. But is signifies “to keep the dignity”

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Submitted on: Sun Jun 14 2015 17:45:33 GMT+0530 (IST)
Category: Folklore
Language: हिन्दी/Hindi

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अपने मुँह… (Hindi Proverbs) –


अपने मुँह मियाँ मिट्ठू |
अर्थात: स्वयं अपनी प्रशंसा करना |
वाक्य: अच्छे आदमियों को अपने मुहँ मियाँ मिट्ठू बनना शोभा नहीं देता ।
English Translation of Hindi Proverb: own mouth uncle parrot
English Equivalent of Hindi Proverb: self-appreciation

अक्ल का चरने जाना |
अर्थात: समझ का अभाव होना
वाक्य: इतना भी समझ नहीं सके, क्या अक्ल चरने गयी थी ?
English Translation of Hindi Proverb: the brain has gone to eat grass
English Equivalent of Hindi Proverb: foolish

अपना हाथ जगन्नाथ |
अर्थात: स्वंय के द्वारा किया गया कार्य ही महत्वपूर्ण होता है.
English Translation of Hindi Proverb: my hand is god
English Equivalent of Hindi Proverb: god resides in one’s action

सौ सुनार की एक लुहार की |
अर्थात: एक महत्वपूर्ण कार्य कई अनर्गल कार्यों से ज्यादा सटीक होता है.
English Translation of Hindi Proverb: a hundred of jewellers is equalled by one of the ironworker
English Equivalent of Hindi Proverb: None

सौ चूहे खा के बिल्ली चली हज को |
अर्थात: धूर्त व्यक्ति द्वारा धिकावे का किया गया अच्छा कार्य
English Translation of Hindi Proverb: after eating a hundred rats, the cat went on a pilgrimage
English Equivalent of Hindi Proverb: None

अधजल गगरी छलकत जाय |
अर्थात: मुर्ख व्यक्ति ज्यादा चिल्लाता है, जबकि ज्ञानी शांत रहता है.
English Translation of Hindi Proverb: half empty pot, spills more.
English equivalent of HIndi Proverb: Empty cans make more noise.

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Submitted on: Sun Jun 14 2015 18:09:14 GMT+0530 (IST)
Category: Folklore
Language: हिन्दी/Hindi

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क़दम मिला कर चलना होगा -Atal Behari Vajpayee


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बाधाएँ आती हैं आएँ
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों में हँसते-हँसते,
आग लगाकर जलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

हास्य-रूदन में, तूफ़ानों में,
अगर असंख्यक बलिदानों में,
उद्यानों में, वीरानों में,
अपमानों में, सम्मानों में,
उन्नत मस्तक, उभरा सीना,
पीड़ाओं में पलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

उजियारे में, अंधकार में,
कल कहार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
जीवन के शत-शत आकर्षक,
अरमानों को ढलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,
प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,
असफल, सफल समान मनोरथ,
सब कुछ देकर कुछ न मांगते,
पावस बनकर ढ़लना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

कुछ काँटों से सज्जित जीवन,
प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
नीरवता से मुखरित मधुबन,
परहित अर्पित अपना तन-मन,
जीवन को शत-शत आहुति में,
जलना होगा, गलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

Photo By: Unknown
Submitted by: Atal Behari Vajpayee
Submitted on: 16-Aug-2018
Category: Non-Original work with acknowledgements
Language: हिन्दी/Hindi

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श्री हनुमान चालीसा -Tulsidas


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दोहा :

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई :

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।

दोहा :

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

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Submitted by: Tulsidas
Submitted on:
Category: Folklore
Language: हिन्दी/Hindi

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तुम्हारा टेलीफून -देवसुत


प्यार की बातें बोलकर मुझे बहलाओ मत ,
अभी बोलो तुम आओगे कब ?
बच्चे रोते हैं, पर पूछते नहीं हैं तुमको ,
हँसकर मैं भी जवाब नहीं देती उनको ।
तुम्हारे पैसों से खाना बनता है, ख़ुशी नहीं ,
बिन बाप के बच्चे, बढ़ेंगे कैसे? पता नहीं !
मुझे पैसों की भरमार नहीं , ख़ुशी चाहिए ,
तुम्हारा हाथ, तुम्हारा साथ चाहिए ।
पैसे अब काफी हैं ज़िन्दगी काटने के लिए ,
बच्चों की देख-रेख और पढ़ाई के लिए ।
बाकी जो बचा, वह कुछ कर लेंगे इधर-उधर ,
अभी बोलो, तुम आओगे कब ?
-देवसुत

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Submitted by: देवसुत
Submitted on: Mon Sep 05 2016 00:00:00 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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पेट खाली पर… – हरेकृष्ण आचार्य


पेट खाली पर सोने का तकिया ।
-हरेकृष्ण आचार्य

English Translation of Hindi Quote:
Stomach is empty but the pillow is of Gold.

Meaning:
Defines a person who cuts down on essentials but splurges on luxury.
हरेकृष्ण आचार्य

Photo By:
Submitted by: हरेकृष्ण आचार्य
Submitted on: Thu Mar 17 2016 11:52:18 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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ह्रदय का क्रंदन -Amar


ह्रदय का क्रंदन या प्रिये का वंदन
या करूँ शंखनाद
अंजुली भर भर अनादर मैं पी चूका
जहर तेज था मैं जी चूका

प्रिये अब तो समझ जाओ
अप्रिय बोल से जी ना जलाओ
मैं जो जला तो तुम्हे क्या सुख दे पाउँगा ?
अंदर के अनल में जल अंदर राख बन जाऊंगा

जो जल जायेगा मन
तन का मोल ना रह जायेगा
तन दिखेगा सुन्दर बस एक
खोल ही तो रह जाएगा

हम नही मिले लड़ने के लिए
अभी तो तवा पर आरजू भी ना हुई
पास रहकर प्रेम की की एक ग़ुफ़्तगू ना हुई

कभी आओ प्रिये अपनी मर्जी से
साथ रहकर देखो की इन झगड़ों में
कितना रस है ,क्योँ दूर हो
खुदगर्जी से।
Amar

Photo By: –
Submitted by: Amar
Submitted on: Wed Feb 17 2016 13:55:48 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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शहर – Part 1 -हरेकृष्ण आचार्य


क्यों हैं यह रास्ते संकरे ?
क्यों हैं यहाँ बाबू अंधे ?
क्यों हैं यहाँ लोग प्यासे मरते ?
जब बाँध हैं पानी से फूटते ?

कहते हैं शहर में पानी कम है
पर फिर गगन-चुम्भी बनाते क्यों हैं ?
ढक देते हैं क्यों ज़मीं को सीमेंट से?
तालाबों को क्यों भर देते ?

पानी कम नहीं स्वार्थ ज़्यादा है
तालाब से ज़्यादा ज़मीन में फायदा है
फ्लैट बनाएंगे और पानी बेचेंगे
और हम?
फ्लैट में रहेंगे और प्यास से मरेंगे ।

-हरेकृष्ण आचार्य
Penned: 15-6-2010
हरेकृष्ण आचार्य

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Submitted by: हरेकृष्ण आचार्य
Submitted on: Sat Mar 05 2016 09:02:50 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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मैं तन्हा प्रिये जागा सारी रात -Amar


मैं तन्हा प्रिये जागा सारी रात
कभी इस करवट कभी उस करवट
बिस्तर पर पड़ती रही अकेलेपन की सलवट
हीर हिर्दय सुलगता रहा
अकेलेपन का नस्तर चुभता रहा
याद तेरी सताती रही पल पल
आँखों से झरना बहा कई बार कलकल

दुःख बड़ा है ये बिरह का
पत्नी होकर भी बिना किसी कारन दूर रहती हो
ये वजह है कलह का

मेरे प्रेम में सम्पूर्णता नही थी
या शादी के मन्त्रों में रही कमी
कारन कुछ भी हो पर प्रिये
मैं आज भी जागा सारी रात
कभी इस करवट कभी उस करवट

Amar

Photo By:
Submitted by: Amar
Submitted on: Wed Feb 17 2016 11:17:11 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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आंसुओं से नहीं… -Janaab



जब जनम पार हो जाए तो बदन राख कर बहा देना
आंसुओं से नहीं , नदी में डाल देना ।
Janaab

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Submitted by: Janaab
Submitted on: Sat Aug 15 2015 15:33:37 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास -Amar


हमें कितना प्रेम दिया जब हम छोटे थे
तब नही थी आपको मुझसे आस
आज क्योँ बदल गए आप
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास

क्या रिश्तों का आँगन ऐसे ही सिमटेगा
अपनों का दामन बस धन में लिपटेगा
क्योँ नही रहा आपको अपनेपन का एहसास
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास

क्या धन के लिए मैं कहीं डाका डालूं
कोई घोटाला कर डालूं
अपने को बेच खुद नई नजर में बना डालूं अपना उपहास
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास

धन से ख़ुशी नही मिलती अप्पा
संतोष बड़ा धन है
सबसे बड़ा धन है आस
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास
Amar

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Submitted by: Amar
Submitted on: Wed Feb 17 2016 10:59:34 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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क्या मैं आपको जानता हूँ ? -हरेकृष्ण आचार्य


क्या मैं आपको जानता हूँ ?

मैंने आपको कहीँ देखा है ।

एक बार नहीं कई बार,
शायद …

लेकिन आप ने मुझे अभी तक नहीं देखा ,
देखते भी तो मुझे पहचानते नहीं
शायद …

एक बार एक मोड़ पे ,
मैं खड़ा इंतज़ार कर रहा था जब ,
एक तेज़ ट्रक में बैठे आप ,
मेरे पास से निकले थे ।

मुझे याद है ,
आप ही थे ,
शायद …

कई बरस बाद फिर ,
एक बरसाती रात में ,
बिजली के खम्बे के पास,
से गुज़रा था मैं जब,
आप खड़े थे बिन भीगे ।

मुझे याद है ,
आप ही थे ,
शायद …

अभी बस कुछ दिनों पहले फिर,
मुझे स्ट्रेचर पर डॉक्टर ले जा रहे थे जब,
आपरेशन थिएटर में बैठे थे आप ।

मुझे याद है ,
आप ही थे ,
शायद …

मेरी यादें अब धुंधली ,
आँखों की रौशनी बुझती ,
बे-आवाज़ कमरे में,
आप अब मुझसे मिलने आए हैं ?

क्या मैं आपको जानता हूँ ?
हरेकृष्ण आचार्य

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Submitted by: हरेकृष्ण आचार्य
Submitted on: Fri Sep 18 2015 22:02:53 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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मिलते रहोगे गर मुझसे … -Janaab



मिलते रहोगे गर मुझसे
पलकों पे आंसू तो आएँगे ही ,
अब तो जनम पार हो गया और बदन राख ,
सांस भी लोगे तो मैं ही मिलूंगा ।
Janaab

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Submitted by: Janaab
Submitted on: Sat Aug 15 2015 15:31:34 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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नमक मिर्च … —


नमक मिर्च लगाना ।
English Translation: To apply salt and chilli.
Meaning: To exaggerate

घाट घाट का पानी पीना ।
English Translation: Drinking water from every river.
Meaning: Becoming experienced.

गुड़ गोबर करना ।
English Translation: Given jaggery, make it dung.
Meaning: To make all good effort come to nought.

1. मस्का लगाना ।
2. मक्खन लगाना ।
English Translation: Apply butter to a person.
Meaning: To praise a person to gain his confidence.

चक्की पीसना ।
English Translation: Run the mill.
Meaning: Work hard as in punishment.

Tags: Namak mirch lagana, ghaat ghaat ka paani peena, gud gobar karna, maska lagaana, makkhan lagaana, chakki peesna

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Submitted by: –
Submitted on: Sun Jun 14 2015 17:45:33 GMT+0530 (IST)
Category: Ancient Wisdom
Language: हिन्दी/Hindi

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जाती ना पूछो… —


जाती ना पूछो साधु की; पूछ लीजिए ज्ञान |
English Translation: Do not ask a saint his class; ask him a question.

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Submitted by: –
Submitted on: Sun Jun 14 2015 17:01:45 GMT+0530 (IST)
Category: Ancient Wisdom
Language: हिन्दी/Hindi

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बूढा बन्दर… -देवसुत


बूढा बन्दर छलाङ्ग ही मारे ।
English Translation: Old Monkey can only jump.
English Equivalent: Old habits die hard.

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Submitted by: देवसुत
Submitted on: Tue May 26 2015 17:04:50 GMT+0530 (IST)
Category: Ancient Wisdom
Language: हिन्दी/Hindi

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मैंने कब पीछे मुड़ देखा ? -हरेकृष्ण आचार्य


मैं भारत

कई आये तूफ़ान , कई बवंडर ,
कई आए बाढ़ , कई भूचाल ,
कितने मरे, कितने बचे,
कितने गिरे, कितने उठे,
कितने गए, कितने आए ,
पर मैंने पीछे मुड़ कब देखा ?

कई आये राम, कई रावण,
कई आये बुद्ध , कई चंगेज़,
कितने मिले, कितने बिछड़े ,
कितने हँसे , कितने रोए ,
कितने ज़िंदा, कितने मुर्दा,
पर मैंने पीछे मुड़ कब देखा ?

कहीं पूजा, कहीं जिहाद,
कहीं यज्ञ, कहीं आतंक,
कितने सुखी, कितने दुखी,
कितने शांत, कितने आतंकी,
कितने सत्य, कितने भ्रम,
पर मैंने पीछे मुड़ कब देखा ?

कहीं प्यार , कहीं बम ,
कहीं जश्न, कहीं सर कलम,
कितने राजा, कितनी प्रजा,
कितने राज्य, कितनी परंपरा ,
कितने राष्ट्र , कितनी जनता ,
पर मैंने पीछे मुड़ कब देखा ?

कितने किले, कितने दरबार,
कितने चोर, कितने मक्कार,
कितने बस बैठे-बैठे आग,

कितने मंत्री, कितने तंत्री ,
कितने वीर, कितने वीरगति,
कितने बस देखते – देखते बलि ,

कितने अशोक, कितने अकबर,
कितने अंग्रेज़ , कितने औरंगज़ेब ,
कितनो ने किया यहाँ हेर – फेर ,
पर मैंने पीछे मुड़ कब देखा ?

पर मैंने पीछे मुड़ कब देखा ।

-हरेकृष्ण आचार्य
21:15, 19/07/2006

First penned in the English Script as below. Lost and found after 8 years thanks to Marisha’s page in Geocities (http://www.geocities.ws/hansteraho/literary/kris_mudke.htm) and indexed by Google.
I always wanted to write it in Hindi Script. Thanks to A Billion Stories to make it so simple. And Marisha’s comment below on the poem:

– another beautiful composition in hindi about the paths tread by the indomitable spirit of India….from Krishna after a long hiatus. –
Marisha

main BHAARAT.

kai aaye toofaan, kai bawandar,
kai aaye baadh, kai bhoochaal,
kitne mare, kitne bache,
kitne gire, kitne uthe,
kitne gaye, kitne aaye,
par maine peeche mud kab dekha?

kai aaye raam, kai raavan,
kai aaye buddh, kai changez,
kitne mile, kitne bichde,
kitne hasse, kitne roye,
kitne zinda, kitne murda,
par maine peeche mud kab dekha?

kahin pooja, kahin jihad,
kahin yagya, kahin aatank,
kitne sukhi, kitne dukhi,
kitne shaant, kitne aatanki,
kitne satya, kitne bhram,
par maine peeche mud kab dekha?

kahin pyar, kahin bum,
kahin jashn, kahin sar kalam,
kitne raja, kitni praja,
kitne rajya, kitni parampara,
kitne rashtra, kitni janata,
par maine peeche mud kab dekha?

kitne kile, kitne darbaar,
kitne chor, kitne makkaar,
kitne bas baithe-baithe aaag,

kitne mantri, kitne tantri,
kitne veer, kitne veergati,
kitne bas dekhte-dekhte bali,

kitne ashok, kitne akbar,
kitne angrez, kitne aurangzeb,
kitno ne kiya yahaan her-pher.
par maine peeche mud kab dekha?

MAINE PEECHE MUD KAB DEKHA?

-B. H. Acharya
21:15, 19/07/2006

हरेकृष्ण आचार्य

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Submitted by: हरेकृष्ण आचार्य
Submitted on: Sat Dec 13 2014 20:39:32 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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आस -Aashirwad


कुछ ख्वाब अधूरे से
कोई प्यास अधूरी सी
इन आँखों में क्यूँ हैं
एक आस अधूरी सी

राह पर जमी रही ये नज़रें
इंतज़ार की इन्तहा होने को आई
फिर भी ना माने मन बावरा
तकता रहा किसी के दीदार मे
ख्वाइश थी मुकम्मल जहाँ बसाने की
रिश्तो के बाज़ार मे

दिन थे वो सुहानी थी रातें भी खुशनुमा
थे हज़ारों परवाने रोशन मोहब्बत के नाम पर
मेरे दिल का मिजाज़ भी था आशिकाना
कम्बख़त था मेरा और धड़कता था किसी और के नाम से
इश्क के सफ़र में हमसफ़र दिलनशी था
दिलबर की अदाओं का आलम हसीं था

फिर शाम घिर आई हैं
फिर यादों का वो घेरा हैं
तेरे निशाँ की तलाश में
खोया चैन-ओ-सुकून मेरा हैं

इस शब् के सियाह साये में
खामोशी हैं, वीरानी हैं
तेरे बिना अधूरी, बिन तेरे अनकही
कुछ ऐसी मेरी कहानी हैं |
Aashirwad

Photo By:
Submitted by: Aashirwad
Submitted on: Mon Feb 17 2014 00:18:27 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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हमारे नन्हे कदम -हरेकृष्ण आचार्य


FeetOnSand-PradeepSahoo.jpg
समय की रेत पे
चले जा रहें हैं
हमारे नन्हे कदम ।
ज़िन्दगी की आंधी में ,
अपने मिटते चिन्हों को
देखकर हँसते हुए ।
कदम कदम पर अगले कदम
के बारे में सोचते हुए ,
चले जा रहें ,
हमारे नन्हे कदम ।

नन्हे कदमों से ,
लम्बे रास्ते साधते हुए ,
अपनी आकांक्षा तारों पे लगाते हुए,
ज़िन्दगी के अगले मोड के,
इंतज़ार में ज़िन्दगी संभालते हुए ,
यही हैं वो नन्हे कदम ।

कुछ नन्हे कदम , कुछ लम्बे रास्ते ,
कुछ टूटे हौंसले , कुछ बुलंद इरादे ।
बुलंद इरादों से सधते लम्बे रास्ते ,
तारों को हासिल करते ,
हमारे यही छोटे से,
नन्हे कदम ।

-हरेकृष्ण आचार्य
01/07/2002, 18.56 hrs

First penned in the English Script as below. Lost and found after 12 years thanks to Marisha’s page in Geocities (http://www.geocities.ws/hansteraho/literary/kris_kadam.htm) and indexed by Google.
I always wanted to write it in Hindi Script. Thanks to A Billion Stories to make it so simple.

Hamare Nanhe Kadam (Hindi)

samay ki ret pe
chale jaa rahein hain
hamaare nanhe kadam.
zindagi ki aandhi mein,
apne mit te chinhon ko
dekhkar hanste hue.
kadam kadam par agle kadam
ke baare mein sochte hue,
chale jaa rahe hain,
hamaare nanhe kadam.

nanhe kadmon se,
lambe raaste saadhte hue,
apni akanksha taaron pe lagaate hue.
Zindagi ke agle mod ke,
intezaar mein zindagi sambhaalte hue,
yahi hai woh nanhe kadam.
kuch nanhe kadam, kuch lambe raaste,
kuch toote hausle, kuch buland eraade.
buland eraadon se sadhte lambe raaste,
taaron ko haasil karte,
hamaare yahi chhote se,
nanhe kadam.

-B. H. Acharya
01/07/2002, 18.56 hrs

हरेकृष्ण आचार्य

Photo By: Pradeep Sahoo
Submitted by: हरेकृष्ण आचार्य
Submitted on: Sat Dec 13 2014 20:16:50 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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मैंने पीछे मुड़ जब देखा -हरेकृष्ण आचार्य


मैंने पीछे मुड़ जब देखा
धुंद में ओझल होती सड़क के पीछे
दो बत्ती,
तेज़ चलती गाड़ी की शायद ,
सोचने के पल ही में ,
दो पहियों के बीच के बम्पर पर सर ,
टकराकर,
पहियों के नीचे, शरीर के टूटने की आवाज़ ,
को सुनकर जब दर्द नहीं हुआ ,
तो मालूम हुआ कि अब ज़िंदा ,
न ही बचूंगा,
शायद ! की उम्मीद फिर भी !
खून से लथपथ कुचले कपड़ों
का गीलापन नहीं महसूस हुआ,
तो लगा, अब तो नहीं बचूंगा ,
शायद ! की उम्मीद फिर भी !
जब न दिखा, न सुना ,
और लगा कि बस एक और पल है सांस ,
तब मैं बोला , नहीं, … सोचा ,
हे राम ।

-हरेकृष्ण आचार्य
हरेकृष्ण आचार्य

Photo By:
Submitted by: हरेकृष्ण आचार्य
Submitted on: Fri Dec 12 2014 16:54:49 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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खम्बों पे ही … -जनाब


खम्बों पे ही कुत्ते मूतते हैं ।
Meaning: There is no good in inaction. OR Inaction causes evil to be bold.
जनाब

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Submitted by: जनाब
Submitted on: Fri Dec 12 2014 15:30:01 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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सोने की सेल -aa21


सोने की सेल
राजस्थान के एक गांव में रामलाल नाम का एक व्यापारी रहता था। उसके दो बेटे थे – चंदन और मधुर। दोनों का जैसा नाम था, वैसे लक्षण तो बिल्कुल भी नहीं थे। यूं चंदन का मतलब शीतलता होता है, परंतु वो चंदन इससे बिल्कुल विपरीत था। और मधुर, उसकी तो मानो बोली ही इतनी कड़वी थी कि मधुर नाम भी स्वयं पर शर्मा जाता था। दोनों बहुत लड़ाके थे। कभी कोई गलती हो जाने पर दोनों में से कोई भी अपनी गलती नहीं मानता और हर गल्त बात का इल्ज़ाम दूसरे पर लगा देता।

रामलाल अपने दोनों बेटों की इन करतूतों से बहुत दुखी था। वह पूरे गांव में अपनी समझदारी और अच्छे व्यवहार के लिये प्रसिद्ध था। सब उसकी दरियादिली की प्रशंसा करते न थकते थे। परंतु अब जैसे-जैसे उसके दोनों बेटे बड़े होते जा रहे थे, उनके दुष्ट आचार के कारण लोग अब रामलाल से भी दूरी बनाकर रखने लगे थे।

एक दिन रामलाल बहुत उदास बैठे था। उसका एक पड़ोसी और बहुत ही प्रिय मित्र था, कन्हैया लाल। वह अक्सर अपने मित्र का दर्द बांटने आता रहता था। रामलाल को काफी दिनों से उदास देखकर कन्हैया लाल ने अपने मित्र से उसकी परेशानी बांटी। “क्यों भाई रामलाल, क्या हाल है? बहुत उदास बैठे हो। सब ठीक तो है ना?” कन्हैया लाल ने पूछा तो मानो जैसे रामलाल को अपने दिल की सारी भड़ास निकालने का मौका मिल गया।

“अरे क्या बताऊँ भाई। नाक में दम कर दिया इन नालायकों ने। एक तो काम-धाम कुछ करते नहीं दोनों! उपर से एक सेर है, तो दूसरा सवा सेर! क्या करूं इन लड़कों का! अब तो नौबत ये आ गयी है कि पूरा गांव मूझसे भी कतराता है। कितना समझा लिया, पर कोई फायदा नहीं। पता नहीं भाग्यवान को भी क्या जल्दी थी नर्क सिधारने की। इन दो आफतों को मेरे गले बांधकर इतने सालों से नर्क के मज़े ले रही है महारानी। अब तुम ही कोई उपाय दे सकते हो तो दो। मैं तो हार गया!”

“पर तुम्हें कैसे पता कि भाभीजी नर्क ही गयी होंगी?”

“अब सीधी सी बात है मित्र, ऐसी औलादों को जन्म देकर स्वर्ग के द्वार तो उन्होने खुद ही अपने लिये बंद कर दिये।” कहकर रामलाल और कन्हैया लाल दोनों ठहाके मारकर हंसने लगे।

इन्ही हंसी-ठिठोलों के बीच अचानक कन्हैया लाल ने रामलाल से कहा, “खैर, अब तो मेरे खय़ाल में तुम्हारे बेटों को सीधा करने का एक ही तरीका है – शादी!”

कन्हैया लाल ने जब अपना सुझाव दिया तो रामलाल के कान गुस्से से लाल हो उठे! “देखो भाई, ढंग कि सलाह देनी है तो दो! अब इस उमर में विवाह करके जो बची-कूची नाक है, उसे भी कटवा दूं क्या! और फिर, ये दो क्या काम हैं, जो तीसरी आफत को भी सर पर बैठना चाहते हो मेरे! ”

“अरे भाई! नाराज़ क्यों होते हो! पहले मेरी पूरी बात तो सुन लो। मैं तुम्हारी नहीं, तुम्हारे बेटों, चंदन और मधुर के विवाह क़ी बात कर रहा हूँ, अब २१ साल के तो हो ही गये हैं दोनों, बस ले आओ दो अच्छी कन्याएँ, अब वे ही इनकी अक्ल को ठिकाने लगा पायेंगी!”

जब कन्हैया लाल ने अपनी बात को ढंग से समझाया तो उसकी बात रामलाल को जंच गयी! ” बात तो ठीक है तुम्हारी! विवाह हो जायेगा तो अपनी ज़ीम्मेदारियों में व्यस्त हो जायेंगे। तभी शायद जीवन के मोल को समझ पायेंगे ये लड़के। ठीक है, कल ही दोनों के लिये रिश्ते ढूंढने का काम शुरू करता हूँ।”

कुछ ही दिनों के बाद रामलाल को अपने दोनों बेटों के लिये एक ही घराने क़ी दो बेटियों का रिश्ता मिल गया। घर अच्छा था और रिश्ता भी बराबरी का था। रामलाल अपने इस कार्य से बहुत संतुष्ट हुआ। वह जल्द ही अपनी बहुओं को घर लाना चाहता था, इसलिये देखते ही देखते बस कुछ ही दिनों में दोनों का लग्न सम्पन्न हो गया।
मगर वो कहावत है न, गये थे रोज़ा छुडाने, गले पड़ी नमाज़! बस, वही हाल बेचारे रामलाल जी का भी हुआ। बहुओं को लाये थे यह सोचकर कि बेटे सुधर जायेंगे, मगर यहाँ तो बहुएँ बेटों से भी बड़कर निकलीं। कहने को तो दोनों सगी बहनें थी, मगर दोनों लडने में चंदन और मधुर से भी दस कदम आगे थी।

बेचारे रामलाल के पास अब कोई चारा न था। अब तो मानो इधर कुआँ उधर खाई वाली हालत थी। बेटे तो पहले ही ऐसे थे, उपर से बहुएं भी सुधरने वालों में से नहीं थी। बेचारे बेसहारा होकर फिर से पहुंच गये अपने मित्र के पास।
“ये तो हद्द ही हो गयी। अब तुम ही बताओ की क्या करूं। तुमने ही मुझे इस उलझन में फंसाया है। सुधारने के चक्कर में मेरे तो बेटे भी हाथ से निकल गये। ”

“अरे घबराते क्यों हो रामलाल? तुम इतने समझदार हो, सारा गांव तुम्हारा लोहा मानता है। और तुम हो, कि अपने ही समय में घबरा गये। अब तो तुम्हारे पास बल्कि अच्छा मौका है, बेटों को अकेले सुधार पाना मुश्किल था, अब बहुओं के सहारे उनका भी बेड़ा पार लगाया जा सकता है। ”

दो बहुएँ, दो बेटे! मतलब कि कुल मिलाकर चार-चार आफतें! बेचारे रामलाल! अब तो दो की बजाय चार की ज़िम्मेवारी आन पढ़ी थी! अब तो इकलौते मित्र ने भी उन्ही पर ये भार छोड़ दिया था! क्या करें! कहाँ जायें! सोचते-सोचते दिन निकल गया और अपनी रफ़्तार से बढ़ता चला गया। अगले दिन:

“अरे बाबूजी, आज क्या अखबार नहीं पढोगे? ये लो, आज का अखबार।” अखबार वाला चिल्लाते हुये आया.

“अरे दे बेटा, एक ये अखबार ही तो सहारा बचा है अब जीवन सुख से बीताने का। बाकि के सुख-चैन तो ना जाने, कब नसीब होंगे! या ना जाने, कभी होंगे भी या नहीं!” निराशा भरे ये स्वर, अपने जीवन के चार अनमोल रत्नों को सुनाने के प्रयत्न में रामलाल ने अखबार वाले से अखबार लिया, और पढना शुरू कर दिया। पढते पढते अचानक अखबार में से एक पर्ची निकल गयी और उढ़ती-उढ़ती घर के मुख्य द्वार पर जा पहुंची। मधुर घर से बाहर निकल रहा था कि अचानक उसकी नज़र अखबार में से निकली उस पर्ची पर पढी.

“सोने की सेल! अरे वाह। ये तो बड़े काम की पर्ची लगती है। ” वह पर्ची को हाथ में उठाकर पढते हुये खुद से बड़बड़ाने लगा।

“अरे क्या है, मुझे दिखा तो।” जब रामलाल ने पर्ची देखने के लिये मांगी तो मधुर ने बात को टालते हुये कहा, “कुछ नहीं बाबूजी, कचरा पड़ा था रास्ते में, फेंककर आता हूँ.”

अब इतना तो रामलाल को भी मलूम था कि उसका बेटा इतना सपूत नहीं कि रास्ते में पड़े कचरे को उठाकर फेंकने का कष्ट करे। ‘खैर, जाने दो! इस नालायक की बातों पर अपना समय कौन बर्बाद करे। अखबार की सुर्खियों पर ही ध्यान ठीक है!’ सोचकर वे अपने अखबार में पुन: व्यस्त हो गए।

“सोने की सेल! दिनांक १० मई, रविवार, गांव के खुुले मैदान में। अरे वाह, बाबूजी के उस बेकार से अखबार में से कोई काम की चीज़ भी निकल सकती है! अरे कमला, सुनती हो, देखो क्या लिखा है, अगले रविवार को दोपहर दो बजे सोने की सेल लगने वाली है, गांव के खुले मैदान में। ”

कमला, यानी मधुर की पत्नी अपने पति परमेश्वर की आवाज़ को यूं तो सुना-अनसुना कर देती थी, परन्तु आज तो पतिदेव ने सोने का नाम लिया था, तो भला हमारी कमला कैसे नहीं सुनती उनकी बात। सो, एक ही आवाज़ पर दौडी चली आयी।

“क्या, सोने की सेल! कहाँ! हमारे गांव में! सच? ”

“अरे हाँ। और वो भी रविवार को, यानि तीन दिन बाद। ”

“अजी मैं क्या कहती हूँ, हम भी चलेंगे इस सेल में। कितने दिन हो गए हमारी शादी को, मगर आपने आज तक मूझे कभी कुछ नहीं दिलाया, कम से कम सेल में घुमाकर ही ले आओ! ”

“अरे तुम चिन्ता क्यों करती हो! मैं क्या बेवकूफ हूँ, अगर तुझे ले जाना न होता, तो मैं बताता ही क्यों! तैयार रहना। और सुन, किसी से कहना मत। किसी से मतलब…”

“अजी मैं समझ गयी, तुम्हारे बाबूजी, भइया और भाभी, हैना। ”

“हाँ रे, तू तो बड़ी समझदार है। ”

मगर अफसोस! चन्दन की पत्नी, और कमला की बहन, यानि, निर्मला ने उन दोनों की सब बातें सुन ली और जाकर अपने पति को सेल की खबर दे दी.

“अच्छा! तो अब ये दोनों पति-पत्नी सेल में जायेंगे! और हम, हम क्या बैठे रहेंगे घर पर! निर्मला, तुम भी तैयारी करके रखना, हम भी सोने की सेल में चलेंगे, और इन दोनों से अधिक खरीददारी कर के लायेंगे। और सुनो, तुम भी किसी से कुछ न कहना!”

मगर कमला और निर्मला थी तो आखिर बहनें! दोनों के पेट में बात पचने कहाँ वाली थी! एक से दो, दो से तीन, और फिर दिन भर में बात पूरे गांव में फै़ल गयी कि गांव के खुले मैदान में सोने की सेल लगने वाली है। गांव के सभी मूर्खों ने अपनी जमापूंजी बेच डाली। कारण, यही कि सेल में अधिक सोना कम भाव में खरीद कर मुनाफा कमायेंगे। उन मूर्खों में रामलाल जी के दोनों बेटे और बहुएँ तो अव्वल नंबर पर थे। आखिर पूरे गांव में ये चर्चा फैलाने वाले भी तो वही थे।

अगले दिन का सूरज उगते ही दोपहर दो बजे, गांव के खुले मैदान में, गांव के सभी मूर्खों का एक अनोखा मेला लगने वाला था, जिसका नाम था, ‘सोने की सेल’!

अगला दिन आया। सारे गांव में हलचल सी मची हुई थी। जिन्हे कारण पता था, वे खुशी से फूले नहीं समा रहे थे, और जिन्हे इस हलचल की कोई खबर न थी, उनको इसी बात की चिन्ता सताये जा रही थी कि आखिर इन सब को हो क्या गया है! रामलाल जी भी इसी बात से परेशान थे कि आखिर उनके दोनों बेटे और बहुएँ अब कौन सा धमाल करने वाले हैं। उन्हे इस बात का अनुमान था कि दोनों ने अपनी सारी जमापूंजी, जो असल में उनकी ही थी, निकाल रखी है, परन्तु किस काम के लिये, ये जानना बहुत मुश्किल किन्तु आवश्यक था। अखिरकार सेल का समय आ ही गया और लग गया मूर्खों का एक विचित्र मेला।

सोने की सेल! सोच-सोचकर ही मन में लड्डू फूटे जा रहे थे। मगर ये क्या! मैदान में तो ना सोने के गहने थे, ना उनकी चमक! वहां पर तो एक नाटक चल रहा था। और नाटक के मंच के पीछे बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था, ‘सोने की सेल’!

तो बात सीधी थी! जो सोने की सेल होने वाली थी, वो तो दरअसल एक नाटक था, जिसे रामलाल के मूर्ख बेटे-बहुओं ने असली सेल समझकर इसकी खबर को आग की तरह फैला दिया।

अब मरते क्या ना करते! बैठ गए वहीं सब सेल का तमाशा देखने के लिये। नाटक शुरू होते ही पूरे मैदान में सन्नाटा हो गया। सभी तमाशे में लीन हो गए।

जब नाटक खत्म हुआ तो सबने चंदन और मधुर से सवाल शुरू कर दिये! मगर उन्होने बात को गांववालों पर ही डालते हुए कहा कि पर्ची सिर्फ उनके घर नहीं, बल्कि पूरे गांव में बंटी होगी। तो सबकी गलती ये थी कि किसी ने अपना दिमाग न लगाते हुए उनकी बात पर भरोसा क्यों किया! खैर, सब जानते थे कि इन दोनों के साथ बहस करना मतलब भैंस के आगे बीन बजाना है! जाने दो! सब घर जाने लगे तो पता चला कि वह लोग जो सेल के भुलावे से खर्चने के लिये पैसा लेकर आये थे, सारा का सारा चोरी हो गया था। पूरे मैदान में खलबली मच गयी। सबने अपने इस नुक्सान का ज़िम्मेवार मधुर और चन्दन को बताते हुए उन्हें पीटना शुरू कर दिया। इतने में वहाँ पर पुलिस आ गयी, “ये सब क्या हो रहा है?”

गांववालों ने सारी बात हवलदार को बता दी।

“ह्म! तो ये है सारा खेल। अब तो इन दोनों को पकड़ना ही पड़ेगा। चलो थाने!”

“मगर हवलदार साहब, मैने कुछ नहीं किया! सेल की झूठी खबर तो इस मधुर ने फैलाई थी और सब बेवकूफ बन गए। ”

चंदन ने अपनी सफाई देने की कोशिश की तो मधुर भला कैसे पीछे रहता!
“नहीं हवलदार साहब, मैने कुछ नहीं किया, मैं तो बस अपनी घरवाली से बात कर रहा था और इसने मेरी बात सुनकर पूरे गांव में ये हल्ला मचा दिया कि गांव में सेल लगने वाली है। अब आप ही बताईये, अपनी घरवाली से बात करना भी कोई अपराध है क्या!”

“मधुर, झूठ मत बोल! तूने भी तो सबको इस झांसे में फंसाया था की गांव में सेल लगने वाली है।”

“…अरे!!! बस करो अब! मेरा सर फटा जा रहा है तुम दोनों की बहस से! चलो, तुम दोनों को ही जेल में बंद कर देता हूँ!”

हवलदार घसीटता हुआ दोनों भाइयों को थाने ले गया और जेल में डाल दिया। दोनों की पत्नियाँ रोते रोते अपने ससुर के पास गयीं और उन्हे सारी बात बता दी।

रामलाल को अपने बेटों की इस करतूत पर बहुत गुस्सा आया। मगर घर कि इज़्ज़त बचाने के लिये उन्हे जेल से छुड़वाना आवश्यक था। उन्हे छुड़वाने के लिये पुलिस स्टेशन पहुंचा। थाने पहुंचकर वहां का नज़ारा देखकर वह दंग रह गया। चंदन और मधुर, जो एक दूसरे की बात को सदैव काटते थे, इस समय एक दूसरे के गले लगकर ज़ोर ज़ोर से रो रहे थे। रामलाल को यह सब बहुत अच्छा लगा। उन्हे ऐसा अनोखा दृश्य अपने जीवन काल में पहली बार देखने को मिला था।

उनकी आँखें खुशी से भर आईं। उन्होने जाकर हवलदार से अपने बेटों की इस करतूत के लिये माफी मांगी और उन्हें ज़मानत पर छोड़ देने की बिनती की।

हवलदार ने चुपचाप जाकर जेल का द्वार खोल दिया, चंदन और मधुर दोनों बाहर आये और अपने पिता से माफी मांगते हुये फूट-फूट कर रोने लगे। परंतु रामलाल ने अपने हृदय को थोड़ा कठोर बनाते हुये दोनों से कहा, “भले ही कानून ने तुम्हे माफी दे दी हो, मगर मेरे लिये तुम आज भी वही नकारा-निकम्मे कपूत हो जिन्होने गांव भर में मेरी इज़्ज़त मिट्टी में मिला दी है। मैं तुम्हें केवल एक ही शर्त पर माफ कर सकता हूँ।”

“क्या बाबूजी??” दोनों ने एक ही स्वर में पूछा।
“यही कि तुम दोनों को मिलकर सारे गांव का हर्ज़ाना चुकाना होगा। और वो भी अपनी कमाई से। भले ही इसके लिये तुम्हे अपना बाकि का सारा जीवन मेहनत करनी पड़े, मगर जब तक ऐसा नहीं होगा, मेरे घर में तुम दोनों के लिये कोई जगह नहीं होगी।

“नहीं बाबूजी, ऐसा मत कहिये आप! हम आपसे वादा करते हैं की हमारे कारण जो आपको कष्ट हुआ है, उसका हर्ज़ाना हम ज़रूर भरेंगे। ”

रामलाल अपने बेटों को इसी शर्त पर घर ले आया। दोनों बेटों में मिट्टी के खिलौने बनाने की अद्भुत कला थी। सो, दोनों ने मिलकर अपनी इस कला को अपना काम बना लिया और इसी ज़रिये दोनों मिलकर खूब पैसे कमाने लगे।

दो वर्ष बीत गये। चंदन और मधुर ने खूब पैसा कमा लिया था। और अब, चारों मिल-जुलकर रहने लगे थे। रामलाल के कहने पर दोनों ने सारा पैसा बेंक में जमा करना शुरू कर दिया और हर्ज़ाने को चुकाने के लिये पैसा इकट्‌ठा करने लगे। पुलिस कि मदद से उन्होने उन बदमाशों को भी पकडवा लिया था जिन्होने नाटक के दौरान सबके पैसे चोरी किये थे। उन्हे सज़ा तो दिलवा दी गयी परंतु वो चोरी के पैसे उनके पास नहीं मिले।

कुछ दिनों के बाद उन चारों को रामलाल ने जब असली कहानी बताई, तो वे अपनी ही मूर्खता और भूल पर हंस पड़े। दरअसल, यह सारा खेल रामलाल का रचाया हुआ था। सोने की इस सेल की कहानी के रचनाकार वही थे, जिन्होने सारे गांववालों, नाटक वालों, पुलिस और नकली चोरों की मदद से अपने दोनों बेटों और बहुओं को सीधा करने की योजना बनाई और इस कार्य में सफल होकर दिखाया।

aa21

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Submitted on: Mon Sep 29 2014 15:39:02 GMT+0530 (IST)
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रफा दफा -A.Kumar


आशीष एटीएम से पैसे निकाल ही रहा था की एक होशियार ने उसको चालाकी से दूसरी तरफ घूमा दिया और जब तक आशीष उसको देख पाता वो उसके दस हज़ार रुपए लेकर बाहर की तरफ निकल गया। बस एक गलती वो कर गया की एटीएम मशीन से पर्ची नहीं ले पाया। और उसी पर्ची के बाहर आते आशीष को मालूम पड़ा की उसके रुपए कोई दूसरा निकाल गया।

वो घबराया हुआ बहार आया तो देखा वो बदमाश कार में बस बैठ कर निकलने ही वाला था। 18 साल के आशीष ने दौर लगा दी और कार के सीसे को तोड़ते हुए उस बदमाश की गर्दन पकड़ ली। गाडी के साथ वो रोड पर घिसट गया पर गाडी छोटी थी आल्टो जैसी कोई गंभीर चोट नहीं आई। पर हाथ में सीसे घुस गए थे। फिर चलती गाडी से ही उसने गाडी की चाभी निकाल ली। अब तो वो बदमाश जिसका नाम आसिफ था, उसने घबराकर उसको पैसे वापस करने चाहे। पर देर हो चुकी थी। आसिफ घिर चूका था। भीड़ ने उसकी ठीक से मरम्मत की और उसको पुलिस के हवाले कर दिया गया।

आशीष ने बहादुरी का काम किया था पर फिर भी थाने में उसके रुपए जमा हो गए और अपना इलाज उसको खुद कराना पड़ा। दो दिन तक कोई FIR दर्ज नहीं हुई और वो थाने के चक्कर काटता रहा। आसिफ बिना कोर्ट में पेश हुए 48 घंटे से ज्यादा हवालात में रह लिया। शायद पुलिस कुछ लेन देन करके मामला ख़त्म कर देना चाहती थी।

इधर आशीष को कॉलेज की फीस भरनी थी – वो थाने के चक्कर अलग लगा रहा था। आखिर लेन देन वाला मामला भी सेट नहीं हुआ। राजीनामा में मन चाही रकम का मामला सही नहीं बैठा और तब तक प्रेस वाले को भी खबर हो गयी।

आखिर FIR तीसरे दिन दर्ज हुई और फिर पेपर में खबर छपी जो इस प्रकार थी – ‘एटीएम में लोगों को मदद करने के नाम पर पैसे उड़ा ले जानेवाले को पुलिस ने दो किलोमीटर दौरा कर पकड़ा। ‘ न बंदी प्रतिक्षीकरण के तहत न आसिफ को समय पर कोर्ट मिला और न आशीष को समय पर उसके रूपए।
पुलिस भी क्या करे। संख्या है नहीं और काम ज्यादा। एक एक पुलिस वाले को रोज 20 -20 घंटे तक काम करना पड़ता है और वो भी सीमित वेतन में। अब रफा दफा ना हो तो क्या हो।
A.Kumar

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Submitted on: Thu Sep 18 2014 12:36:13 GMT+0530 (IST)
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सड़क (छाप) नेता -A.Kumar


नेता जी
वो पटना साइंस कॉलेज से बारहवीं पास करने के बाद आई.आई. टी दिल्ली से डिग्री लेकर नौकरी करने आये अपने स्टेट में एक पथ निर्माण विभाग के इंजीनियर के तौर पर। वो चाहते तो विदेश में जाकर अच्छा दाम कमा सकते थे पर बिहार के नए मुख्यमंत्री के भासन सुनने के बाद उनका अपने प्रदेश के लिए कुछ करने का जज्बा पक्का हो गया था।
पर काम करते हुए महीना नही हुआ की वो समझ गए की बिहार की सड़क कभी सुधर नही सकती क्योँकि ये तो सड़क निर्माण बिभाग के नेता जी के कमाई से सीधा जुड़ा हुआ मामला था।
मुख्यमंत्री के पास शिकायत की चिट्ठी लिखी। पर वो चिट्ठी फिर अग्रेसित की गयी पथ निर्माण मंत्री के पास। यानि खुद के खिलाफ जांच का जिम्मा खुद मंत्री जी को ही सौंपा गया। अब तो मंत्री जी का आग बबूला होना स्वभाविक था।
मंत्री जी ने तुरंत इंजीनियर के खिलाफ जाँच शुरू की तो पता चला की इंजीनियर साहब की डिग्री तो न ही AICTE और न ही UGC से मान्यता प्राप्त है। बस मंत्री जी ने बर्खास्तगी का फरमान जारी कर दिया।
अब खबर तो बननी ही थी। बवेला मचा जब मंत्री जी के खिलाफ तो वो पुराने औकात पर आये। यानी गुंडा गर्दी पर और इंजीनियर साहब को मरवाकर रेल की पटरी पर फेंकवा दिया। खूब जांच हुई और आज भी जांच चल रही है। और आज भी हर साल सड़क बनती है मंत्री जी से लेकर सभी नेता खूब कमाई करते हैं।
A.Kumar

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Submitted on: Wed Sep 03 2014 12:53:59 GMT+0530 (IST)
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वो पूछते हैं की उनके बिन मैं कैसे जिया -A.Kumar


अरे । मैं उनके पीछे दौरा भागा किया,
एक बूँद अमृत की चाह थी,
फिर भी मैंने सागर पिया ।
फिर भी वो पूछते हैं की उनके बिन कैसे जिया ?
उनके बिन हो गया था दीवाना,
फिर कहाँ था दर्द,
जब हो चला था खुद से बेगाना ।
कितनी आहें भरी, कितनी सिसकियाँ रोइ
खुद को कैसे भी उनसे मिलने की उम्मीद दे जिन्दा बस रख लिया
फिर भी वो पूछते हैं की उनके बिन मैं कैसे जिया ?
A.Kumar

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Submitted on: Sat Aug 09 2014 13:04:25 GMT+0530 (IST)
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मेरे प्यारे बेटे -देवसुत


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मेरे प्यारे बेटे
आज चलो हम ऊपर देखें ।

देखो देखो,
दूर आकाश मे हैं खिलते तारे
कुछः पास,
कुछः दूर,
पर सारे ।
तारो से भी दूर और तारे
कुछः दूर,
कुछः और दूर,
पर सारे ।

कुछः छोटे,
कुछः बडे,
पर गोल सारे ।
कुछः बडे,
कुछः और बडे,
पर गोल सारे ।

तारों के गिर्द,
ग्रह मन्डराते,
अपने अपने ,
तारों के चक्कर काटते ।

सब तारों मे,
एक तारा है सबसे खास,
वो है हमसे सबसे पास,
हाँ,
तुम्हारा सूर्य मामा,
जो इस समय है,
पृथ्वी के उस पार ।

और वो देखो,
तुम्हारा प्यारा चन्दामामा,
सूर्य के नहीं,
पृथ्वी के चक्कर काटता,
सारे बच्चों को मुस्कुराता,
हाँ,
तुम्हारा प्यारा चन्दामामा ।

शुक्र, बुध, पृथ्वी, मङ्गल,
बृहस्पती, शनी, नेप्च्यून, युरेनस,
हैं सब सूर्य के चक्कर काटते,
सब मिलकर सौरमन्डल बनाते ।

इतने सारे
गृह, तारे,
पर पृथ्वी पर ही हैं
हम सारे ।
वन, उपवन,
खेत, खलिहान,
जीव, जन्तू,
और हम सारे ।

खेलना, कूदना,
हँसी, ठहाके,
लड़ना, रोना,
बैठकर खाना,
मित्रता, शत्रुता,
सब निभाना,
पर,
मेरे प्यारे बेटे,
इस माँ पृथ्वी,
की रक्षा करना,
मत भूलना ।
देवसुत

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Submitted by: देवसुत
Submitted on: Tue Apr 29 2014 13:29:54 GMT+0530 (IST)
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अक्स -Aashirwad


कुछ भीगे भीगे एहसास
चंद लम्हों का साथ
कुछ दिल में कैद मीठी यादें
वो खुशनुमा पल
वो बिखरें वादे

तेरे साथ गुज़ारा हुआ कल
वो वफ़ा के किस्से, वो प्यार के पल
कभी हँसाते हैं, कभी रुलाते हैं
रातों को जगाते हैं
तन्हा सा कर जाते हैं

तेरे अक्स के निशाँ
क्यूँ मुझे सताते हैं
क्यों लौट के वापस आते हैं
मेरे ज़हन में बस जाते हैं
जाने वाले तो एक दिन चले जाते हैं
Aashirwad

Photo By:
Submitted by: Aashirwad
Submitted on: Sun Feb 16 2014 02:19:38 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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सफलता की राह -Shilpa Gupta


अगर सफलता की राह मुश्किल होगी,
तभी तो मंज़िल पर पहुंचने की खुशी होगी,
कहने के लिए कोई दास्तान होगी,
अंधकार के पलों की यादें होंगी,
भगवान पर मानवता के विश्वास की जीत होगी ।

अगर सफलता की राह मुश्किल होगी,
तभी तो रास्तों के काटों को कोई रौंदेगा,
गगन के गर्जन को चुनौती देगा,
पवन के थपेड़ों का सामना करेगा,
और आग कि लपटों में झुलसेगा,
तभी तो जनम होगा एक नए अध्याय का,
जश्न होगा अच्छाई का बुराई पर जीत का ।

अगर सफलता की राह मुश्किल होगी,
तभी तो सवालों के जवाब मिलेंगे,
तालों से बंद पड़े दरवाज़े खुलेंगे,
अपने अंदर को तलाशने कि कोशिश पूरी होगी,
अपने गुण दुर्गुण की पहचान होगी,
अगर सफलता की राह मुश्किल होगी,
अगर सफलता की राह मुश्किल होगी ।

Shilpa Gupta

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Submitted by: Shilpa Gupta
Submitted on: Sat Jan 25 2014 12:48:59 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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बुआ के फूल -Sumitdis


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कल बुआ का श्राद्ध विधि-विधान से सम्पन्न हो गया, लगभग सभी लोग चले गए, अंश आज सुबह ही गया था, सलोनी का एक पेपर बाकी था तो उसे लेकर जाना पड़ा। कल कांता भाभी और फूफाजी भी चले जायेंगे, प्रियांश धीरज की सहायता के लिए रुक गया है।

२० – २५ दिनों से, जब से बुआ की तबियत बिगड़ने लगी थी धीरज को सांस लेने की भी फुर्सत नहीं थी, वह छुट्टी लेकर लगातार बुआ के साथ रह रहा था, डॉक्टर को दिखाने या अस्पताल ले जाने की पूरे गाँव के जिद के आगे भी बुआ नहीं झुकी थी,”नहीं ! मुझे कहीं नहीं जाना है, मरना है तो यहीं मरूँगी अपने कुल देवता की शरण में ! मेरा बेटा भरी जवानी में चला गया, मुझे क्यों बुढ़ापे में जिंदा रखना चाहते हो?”

“मैं तो सच्चे अर्थों में बेटे के साथ उसी दिन मर गई थी, उसकी कुछ जिम्मेदारियाँ थी, जिन्हें मैंने अपनी सामर्थ्य से पूरा कर दिया है, जो नहीं कर पाई उसे ईश्वर सम्भालेंगे !” बुआ ने एक तरह से इच्छा-मृत्यु का वरण किया था।

उस रात धीरज उनके सिरहाने बैठा ऊंघ रहा था, उन्हें साँस लेने में बहुत तकलीफ हो रही थी, उन्होंने धीरे से धीरज का हाथ दबाया, धीरज ने चौंक कर पूछा- बुआ पानी चाहिए?

“उस अलमारी को खोल कर मेरी डायरी दे !”

धीरज ने डायरी निकाल कर उन्हें थमा दी बुआ ने एक कागज निकाल कर उसकी तरफ बढ़ाया-

“क्या है?”

बुआ ने धीरे से कहा- पढ़ ले, मेरे मरने के बाद अपने फूफा को दे देना !

धीरज उसे मोड़ कर रखने लगा तो बुआ धीरे से बोली- ‘पढ़ ले और जैसा लिखा है, वैसे ही करना !

धीरज पढ़ने लगा। बिना किसी संबोधन के चंद पंक्तियाँ थी- मैं जा रही हूँ, आप आज़ाद तो पहले भी थे, फिर भी मेरे कारण समाज में जो एक बंधन था, उससे भी मैं आपको मुक्त करती हूँ, आपके दिए शूल को मेरा जीवित शरीर तो झेल गया पर मेरे मृत शरीर को छूकर मेरी आत्मा को दूषित मत कीजियेगा, मेरे श्राद्ध का पूरा कर्म मेरे पोते करेंगे। इन तेरह दिनों में उन लोगों की देखभाल धीरज और उसकी पत्नी करेंगे। आपकी बहू को भी उन लोगों से दूर ही रखियेगा क्योंकि मैं इतने दिन सूक्ष्म शरीर से उन लोगों के साथ रहूँगी और आप लोगों का स्पर्श मुझे दूसरे लोक में भी मुक्ति नहीं देगा।

धीरज की आँखे भर आई थी, वो विवशता से बुआ की तरफ देखने लगा।

बुआ ने कराहते हुए कहा- तू क्यों रोता है? तूने तो अपना कर्तव्य पूरा निभाया, पूरी जिंदगी में कभी कुछ पुण्य ज़रूर किये थे जिससे तुम मिले। मेरे पोते तुम्हारे हवाले हैं, उन्हें सही राह दिखाना। उन लोगों को फोन कर दो, मुंबई से आने में भी तो समय लगेगा।

धीरज फोन करने हॉल में गया और लौट कर आया तब तक बुआ अपनी अनंत यात्रा पर निकल चुकी थी। धीरज की पत्नी बगल वाले कमरे में सो रही थी, उसे बुला कर उसने शव को भूमि पर उतारा, घड़ी देखी, 6 बज रहे थे, ठण्ड की सुबह थी, धूप अभी निकली नहीं थी, उसने फूफा को फोन कर दिया, अभी तक नाम मात्र को निभते चले आ रहे रिश्ते का अंत तो उन्हें बताना ही था।

दो घंटे के भीतर वे लोग आ भी गए, गाँव वालों की भीड़ इकट्ठी हो गई थी।

धीरज ने एकांत में बुआ का पत्र लिफाफे के आवरण से ढक कर फूफा को पकड़ा दिया, उनके चेहरे की प्रतिक्रिया देखने के लिए भी वह वहाँ नहीं रुका। पत्र देने के बाद से धीरज महसूस कर रहा था कि फूफाजी उसे देख कर आँखें चुरा लेते थे। जिस घटना को वे अब तक तीन ही लोगों तक सीमित मान कर वे सहज थे, आज चौथे को उसका साक्षी जान कर असहज हो गए थे। धीरज भी उनके सामने जाने की कम से कम कोशिश करता।

धीरज को उड़ती-उड़ती खबर मिली थी कि भाभी अब मायके में ही रहती हैं, फूफाजी अकेले ही रहते थे, किसी भी असामान्य सम्बन्ध की आयु क्षीण ही होती है उन लोगों की नजदीकियों ने कितनों को उनसे दूर किया था, अब शायद उन्हें समझ में आ रहा होगा। बुआ ने तो उन्हें सदा के लिए दूर कर ही दिया था। अंश और प्रियांश भी उनके करीब नहीं आ पाए, वे दोनों बस औपचारिकतावश उनके पास जाते थे।

दूसरे दिन बुआ दोनों पोतों और भतीजों के कन्धों पर चढ़ कर शान से विदा हो गई। अंश तो कुछ शांत था, प्रियांश का रो रो कर बुरा हाल था। धीरज के मना करने के बावजूद अंश सलोनी को लेकर आया था- नहीं चाचा, दादी उसे बहू मान चुकी थी और बहू को सास के अंतिम दर्शन तो करना ही चाहिए। गाँव में भी सबको उसका परिचय मेरी होने वाली पत्नी के रूप में ही दीजिएगा।

धीरज के पिता बुआ के चचेरे भाई थे, उनकी आकस्मिक मौत से धीरज का पूरा परिवार संकट में पड़ गया था, गाँव की नाम मात्र की खेती से किसी तरह खाने लायक निकल पाता था, धीरज दसवीं में था और उसका छोटा भाई सातवीं में ! ऐसे समय में बुआ इन दोनों भाइयों को अपने साथ ले आई, बुआ का गाँव शहर के पास ही था, धीरज बी एड करके बुआ के गाँव के ही स्कूल में अध्यापक हो गया था और तभी से बुआ के दूसरे बेटे का फ़र्ज़ निभा रहा था। छोटा भाई भी डिप्लोमा करके नौकरी करने लगा था। संजीव भइया धीरज से पाँच महीने बड़े थे, जब तक संजीव भईया स्कूल में थे तब तक बुआ फूफाजी के साथ सिंगरोली में ही रहती थी। संजीव भईया का पी एच यू के एक मेडिकल कॉलेज में एडमिशन हो गया, बुआ को घर का सूनापन काटता।

फूफाजी अपनी सिविल इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ कर बिल्डर बन गए थे, पूरे शहर में कई हाऊसिंग सोसाइटियों का कंस्ट्रक्शन उन्होंने ही करवाया था। अच्छी खासी कमाई थी। फूफाजी अपनी व्यस्त दिन चर्या के कारण बुआ को समय नहीं दे पाते, गाँव में भी बहुत संपत्ति थी इसलिए बुआ धीरे धीरे गाँव में ही आकर बस गई, संजीव भईया इंटर्नशिप कर रहे थे। बुआ उनसे कहती ”शादी कर ले ” लेकिन बिना पीजी किये वे शादी के लिए तैयार नहीं थे। बुआ उन्हें समझाती “तू पीजी करना, बहू कुछ दिन मेरे पास रहेगी।”

एक बार फूफाजी के एक सहयोगी के यहाँ संजीव भईया ने कांता भाभी को देखा और मुग्ध हो गए। कांता भाभी के पिता शहर के नामी ठेकेदार थे। भईया का पीजी के बाद शादी का फ़ैसला बदल गया और उनकी शादी हो गई।

शादी के बाद भाभी अक्सर भईया के पास होस्टल चली जाती या भईया को सिंगरोली बुला लेती। भाभी ने दो साल में दो पोते देकर बुआ को निहाल कर दिया था।

भैय्या इस बार खूब मेहनत कर रहे थे सबको उम्मीद थी की उनका सिलेक्शन हो जायेगा लेकिन भाग्य में तो कुछ और ही लिखा था, उनकी मोटर साईकल का ऐसा जबरदस्त एक्सीडेंट हुआ कि उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। पूरा परिवार दुःख के इस भीषण प्रहार से टूट गया कोई किसी को सहारा देने लायक नहीं था। धीरज और उसकी पत्नी ही किसी तरह सबको संभाल रहे थे। बुआ सूनी आँखों से बस दूर कहीं देखती रहती। दोनों पोतों को देख कर ही उनकी आँखों में थोड़ी चमक आती।

फूफाजी जब शहर जाने लगे तो बुआ से कहा- कांता को कोई नौकरी कर लेनी चाहिए, घर मैं बैठ कर इतनी बड़ी जिंदगी कैसे गुजरेगी।

बुआ बिना किसी प्रतिवाद के सब कुछ केवल सुन लेती। एक साल के बाद कांता भाभी ने शहर के एक प्रायवेट स्कूल में नौकरी कर ली। बुआ कुछ दिन दोनों बच्चों को लेकर उनके साथ रही, फिर उन्होंने तय किया कि जब तक दोनों बच्चे स्कूल जाने लायक होते हैं, उन्हें वे अपने साथ गाँव में रखेंगी, बीच-बीच में भाभी आ जाया करेंगी। वैसे भी बच्चों के प्रति भाभी को मोह न पहले था न अब !

बुआ बच्चों को घर में प्रारंभिक शिक्षा के साथ उत्तम संस्कार भी दे रही थी, दोनों का नामकरण भी बुआ ने ही किया था- अंश और प्रियांश ! ‘मेरे संजीव के अंश और प्रियांश है ये दोनों’

जब उनके स्कूल जाने का समय आया भाभी को उनकी देखभाल में परेशानी होने लगी तो हार कर उन्हें सिंगरोली में ही होस्टल में डालना पड़ा। धीरज महीने में 2-3 बार उन बच्चों को दादी के हाथ का बना ढेर सारा खाने का सामान पहुँचाता। धीरज को भाभी के स्वाभाव पर आश्चर्य होता, इन्सान जिससे प्रेम करता है उसकी निशानी से तो उससे भी अधिक प्रेम करना चाहिए। पता नहीं भाभी को भईया से प्रेम था या केवल दैहिक सुख की कामना से ही वे उनका साथ चाहती थी।

इधर फूफाजी की भी हरकतें उसे अजीब सी लगती वे भाभी की छोटी से छोटी ज़रूरतों का भी ख्याल रखते, उन्हें स्कूल छोड़ना, घर ले आना, सब फूफाजी की ही ज़िम्मेदारी थी। कितनी भी व्यस्तता क्यों न हो, वे सब काम छोड़ कर भाभी का काम करते। बुआ के प्रति फूफाजी की लापरवाही को वह उनकी आदत समझता था लेकिन बुढ़ापे में व्यक्ति की आदतें क्या इतनी अधिक बदल सकती हैं?

एक बार जब गाँव में उसकी पत्नी ने कहा था- कांता भाभी जब नहा रही थी, तब बाथरूम में गीज़र खराब हो जाने पर फूफाजी उन्हें गर्म पानी भर कर दे रहे थे।

तब धीरज ने उसे बेकार की बात कह कर टाल दिया था लेकिन उसे यह देख कर बुरा लगता कि महिलाओं की ज़रूरत की नितांत निजी चीजें भी फूफाजी ही भाभी को लाकर देते !

फिर भी वह मन को समझाता कि शायद बेटे को खो देने के बाद वह भाभी से हमदर्दी में ही उनका ख्याल रखते हैं।

धीरे धीरे समय बीतता गया, अंश का दसवीं का बोर्ड था, बुआ अब ज्यादा शहर नहीं जा पाती थी, बच्चों से मिले बहुत दिन हो गए थे, एक दिन उन्होंने धीरज को बुला कर कहा- कल रविवार है, मुझे ज़रा बच्चों से मिला ला ! बहु से भी बहुत दिनों से नहीं मिल पाई हूँ, अपने फूफाजी को फोन करके बता देना कि मैं आ रही हूँ।

उस दिन एस टी डी फेल थी और इतनी छोटी सी बात के लिए धीरज ने खबर करना ज़रूरी नहीं समझा।

वे लोग 5 बजे वाली बस से चले और 7 बजते बजते पहुँच भी गए। धीरज ने दरवाजे की घण्टी दबा दी, काफी देर बाद फूफाजी दूध का पतीला लिए बाहर आए। उन्होंने समझा शायद दूध वाला आया है, उन लोगों को देख कर वे चौंक गए, उनके चेहरे का रंग बदल गया। बिना इस बात पर ध्यान दिए बुआ मुस्कराती हुई सामान लिए सीधे अपने बेडरूम में चली गई। फूफाजी छत पर चले गए थे। तब तक दूध वाला आ गया और धीरज दूध लेने लगा। अचानक बुआ बदहवास सी बाहर आ गईं, उनका चेहरा बिल्कुल सफ़ेद पड़ गया था, धीरज उनका चेहरा देख कर डर गया। बचपन मैं बरफ के गोले को एक ही जगह से चूस-चूस कर जैसे वह सफ़ेद कर देता था वैसा ही चेहरा बुआ का हो गया था।

भाभी को नहीं आता देख धीरज तीन कप चाय बना लाया। तब तक बुआ बाहर से अन्दर आती हुई बोली- बच्चों को जल्दी ले आ।

और पूजा घर में घुस गई।

धीरज अकेला ही चाय पीने लगा। तभी उसने भाभी को बुआ के कमरे से निकलते देखा, वे चुपचाप बाथरूम में घुस गई थीं। न समझते हुए भी धीरज को बहुत कुछ समझ में आ गया।

वह कौन सी बात थी जिसने फूफाजी और बुआ दोनों के चेहरे का रंग बदल दिया, इसका अनुमान धीरज को भी हो गया। वह जल्दी जल्दी चाय खत्म करके बच्चों को लाने के लिए निकल गया। घर के दम घोंटू वातावरण से वह भी घबरा गया था।

बच्चे घर में घुसते ही दादी को ढूंढने लगे। दोनों को देखते ही बुआ उन्हें गले लगा कर चीत्कार कर उठी। ऐसा करूण रुदन तो उन्होंने भैय्या की मौत पर भी नहीं किया था।

बच्चे भी नहीं समझ पा रहे थे कि दादी इतना क्यों रो रही हैं। बच्चे दो ही घंटे के लिए आये थे, बुआ ने उन्हें पढ़ाई सम्बन्धी ज़रूरी हिदायतें दी और साथ लाये खाने का सामान उन्हें सौंप कर उन्हें विदा कर दिया। धीरज बच्चों को पहुँचा कर लौटा तब तक बुआ भी चलने को तैयार बैठी थी।

धीरज ने कहा भी- बुआ, बस शाम को है।

लेकिन बुआ ने शांत स्वर में जवाब दिया- चलो स्टैंड पर ही बैठेंगे, यहाँ दम घुट रहा है।

घर लौटने तक रात हो गई। धीरज ने तो बीच में दो बार चाय पी ली थी, लेकिन बुआ ने सुबह से एक घूंट पानी तक नहीं पिया था। उन्होंने रात को धीरज को अपने पास ही रोक लिया, खाना बनाया उसे परोस कर पास ही बैठ गई। उनका शांत और गंभीर स्वर धीरज सुन रहा था- आज तूने जो कुछ भी देखा या समझा, उसे केवल अपने तक ही सीमित रखना। मेरी तो कोख और मांग दोनों ही उजड़ गए। अगर वे किसी वेश्या को भी घर में लाकर रख लेते तो भी मुझे इतना कष्ट नहीं होता। बहू किसी के साथ भाग जाती या दूसरी शादी कर लेती, मैं बर्दाश्त कर लेती। दोनों ने सम्बन्ध की पवित्रता को ही कलंकित कर दिया। मेरे साथ की गई बेवफाई के लिए मैं उन्हें माफ़ कर भी देती, लेकिन मेरे बेटे के साथ उन्होंने धोखा किया, इसके लिए मैं उन्हें सौ जन्मों तक माफ़ नहीं करुँगी। चुप मैं केवल इसलिए रही या रहूँगी, क्यूंकि समाज में अगर उनकी इज्ज़त पर कीचड़ उछलेगा तो उसके छींटे मेरे अंश और प्रियांश की पवित्र जिंदगी को भी मलिन कर देंगे।

उस दिन के बाद से बुआ की तपस्या शुरू हुई। उन्होंने अपनी चूड़ियाँ उतार दी, बिंदी और सिंदूर लगाना बंद कर दिया। अपने गहनों के तीन भाग कर एक धीरज की पत्नी को दे दिया, दो भाग अंश और प्रियांश के नाम खोले अलग अलग लोकरों में डाल दिए। तन ढकने के लिए दो-तीन सादी और शरीर बचाने के लिए दो समय का खाना उनकी ज़रूरत था। अंश और प्रियांश जब परीक्षा के बाद आये, तब बनारस ले जाकर उनका जनेऊ कर आई। अंश का रिज़ल्ट अच्छा आया जिस साल उसने बारहवीं की परीक्षा दी, उसी साल उसका चयन मुंबई के एक अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज में हो गया। प्रियांश भी पहले ही साल मेडिकल में आ गया। छुट्टियों में दोनों भाई अपने माँ या दादाजी के पास जाते तो ज़रूर थे लेकिन श्रद्धा और प्यार सिर्फ दादी से ही था…

इस बार दुर्गा पूजा की छुट्टियों में धीरज बुआ को दिल्ली छोड़ आया, वहाँ अंश किसी प्रोजेक्ट के सिलसिले में आया हुआ था, प्रियांश की भी तीन-चार दिन की छुट्टी थी, वह भी आ गया।

बुआ उन्हें लेकर वैष्णो देवी गई थी, वहाँ से लौट कर वे बहुत खुश नज़र आ रही थी। एक दिन धीरज को बुला कर उन्होंने एक फोटो दिखाते हुए कहा- देख ले तेरी होने वाली बहू है, अंश के साथ ही पढ़ती है, दिल्ली में उससे मिल चुकी हूँ, उसे भी वैष्णोदेवी ले गई थी। देवी के सामने दोनों को एक दूसरे का हाथ थमा कर मैं निश्चिन्त हो गई हूँ। बहुत सुन्दर, समझदार और सुलझी हुई लड़की है। शादी तो दोनों पढ़ाई खत्म करके ही करेंगे, उतना इंतज़ार यह शरीर नहीं कर पायेगा। अब बोरिया-बिस्तर समेटने का समय आ गया है। जिंदगी के लिए मंसूबे बनाते तो लोगों को बहुत देखा और सुना है, बुआ तो मौत की तैयारी में व्यस्त थी। ऐसा लगता था कि यमदूत उनके खरीदे गए गुलाम की तरह खड़े हों।

धीरज कल शाम से ही बेसुध सोया था, प्रियांश की बात से उसकी नींद खुली- चाचा उठिए, दादा और माँ भी चले गए। आज तो दादी के फ़ूल संगम में विसर्जित करने के लिए निकलना है ना !

सो लेने से धीरज की थकावट सचमुच कम हो गई थी। वह इलाहबाद जाने के लिए तैयार होने लगा। उसे संगम में उन कंटीली यादों को भी विसर्जित करना था, जिनके शूल से छलनी हो कर उसकी प्यारी बुआ इन फूलों में परिणित हुई थी।

Photo By: Pradeep Sahoo
Submitted by: Sumitdis
Submitted on: Thu Jan 30 2014 20:10:01 GMT+0530 (IST)
Category: Fiction-An Imaginary Story
Language: हिन्दी/Hindi

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खरगोश और हथी (पञ्च्तन्त्र की कथाएঁ) -देवसुत


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एक वन में हाथियों का एक झुंड रहता था। झुंड के सरदार को गजराज कहते थे। वो विशालकाय, लम्बी सूंड तथा लम्बे मोटे दांतों वाला था। खंभे के समान उसके मोटे-मोटे पैर थे। जब वो चिंघाड़ता था तो सारा वन गूंज उठता था।

गजराज अपने झुंड के हाथियों से बड़ा प्यार करता था। स्वयं कष्ट उठा लेता था, पर झुंड के किसी भी हाथी को कष्ट में नहीं पड़ने देता था और सारे के सारे हाथी भी गजराज के प्रति बड़ी श्रद्धा रखते थे।

एक बार बारिश न होने के कारण वन में अकाल पड़ा। नदियां, सरोवर सूख गए, वृक्ष और लताएं भी सूख गईं। पानी और भोजन के अभाव में पशु-पक्षी वन को छोड़कर भाग खड़े हुए। गजराज के झुंड के हाथी भी अकाल के शिकार होने लगे। वे भी भोजन और पानी न मिलने से तड़प-तड़पकर मरने लगे। झुंड के हाथियों का बुरा हाल देखकर गजराज बड़ा दुखी हुआ। वह सोचने लगा, कौन सा उपाय किया जाए, जिससे हाथियों के प्राण बचें।

एक दिन गजराज ने तमाम हाथियों को बुलाकर उनसे कहा, ‘इस वन में न तो भोजन है, न पानी है! तुम सब भिन्न-भिन्न दिशाओं में जाओ, भोजन और पानी की खोज करो।’

हाथियों ने गजराज की आज्ञा का पालन किया। हाथी भिन्न-भिन्न दिशाओं में छिटक गए। एक हाथी ने लौटकर गजराज को सूचना दी, ‘यहां से कुछ दूर पर एक दूसरा वन है। वहां पानी की बहुत बड़ी झील है। वन के वृक्ष फूलों और फलों से लदे हुए हैं।’ गजराज बड़ा प्रसन्न हुआ। उसने हाथियों से कहा कि अब हमें देर न करके तुरंत उसी वन में पहुंच जाना चाहिए, क्योंकि वहां भोजन और पानी दोनों हैं। गजराज अन्य हाथियों के साथ दुसरे वन में चला गया।

उस वन में खरगोशों की एक बस्ती थी। हाथी खरगोशों की बस्ती से ही होकर झील में पानी पीने के लिए जाया करते थे। हाथी जब खरगोशों की बस्ती से निकलने लगते, तो छोटे-छोटे खरगोश उनके पैरों के नीचे आ जाते थे। कुछ खरगोश मर जाते थे, कुछ घायल हो जाते थे।

रोज-रोज खरगोशों को मरते और घायल होते देखकर खरगोशों की बस्ती में हलचल मच गई। खरगोश सोचने लगे, यदि हाथियों के पैरों से वे इसी तरह कुचले जाते रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब उनका खात्मा हो जाएगा।

अपनी रक्षा का उपाय सोचने के लिए खरगोशों ने एक सभा बुलाई। सभा में बहुत से खरगोश इकट्ठे हुए। खरगोशों के सरदार ने हाथियों के अत्याचारों का वर्णन करते हुए कहा, ‘क्या हममें से कोई ऐसा है, जो अपनी जान पर खेलकर हाथियों का अत्याचार बंद करा सके ?’

सरदार की बात सुनकर एक खरगोश बोल उठा, ‘यदि मुझे खरगोशों का दूत बनाकर गजराज के पास भेजा जाए, तो मैं हाथियों के अत्याचार को बंद करा सकता हूं। ‘सरदार ने खरगोश की बात मान ली और खरगोशों का दूत बनाकर गजराज के पास भेज दिया।

खरगोश गजराज के पास जा पहुंचा। वह हाथियों के बीच में खड़ा था। खरगोश ने सोचा, वह गजराज के पास पहुंचे तो किस तरह पहुंचे। अगर वह हाथियों के बीच में घुसता है, तो हो सकता है, हाथी उसे पैरों से कुचल दे। यह सोचकर वह पास ही की एक ऊंची चट्टान पर चढ़ गया। चट्टान पर खड़ा होकर उसने गजराज को पुकारकर कहा, ‘गजराज, मैं चंद्रमा का दूत हूं। चंद्रमा से तुम्हारे लिए एक संदेश लाया हूं।’

चद्रमा का नाम सुनकर, गजराज खरगोश की ओर आकर्षित हुआ। उसने खरगोश की ओर देखते हुए कहा, ‘क्या कहा तुमने? तुम चद्रमा के दूत हो? तुम चंद्रमा से मेरे लिए क्या संदेश लाए हो?’

खरगोश बोला, ‘हां गजराज, मैं चंद्रमा का दूत हूं। चंद्रमा ने तुम्हारे लिए संदेश भेजा है। सुनो, तुमने चंद्रमा की झील का पानी गंदा कर दिया है। तुम्हारे झुंड के हाथी खरगोशों को पैरों से कुचल-कुचलकर मार डालते हैं। चंद्रमा खरगोशों को बहुत प्यार करते हैं, उन्हें अपनी गोद में रखते हैं। चंद्रमा तुमसे बहुत नाराज हैं। तुम सावधान हो जाओ। नहीं तो चंद्रमा तुम्हारे सारे हाथियों को मार डालेंगे।’

खरगोश की बात सुनकर गजराज भयभीत हो उठा। उसने खरगोश को सचमुच चंद्रमा का दूत और उसकी बात को सचमुच चंद्रमा का संदेश समझ लिया उसने डर कर कहा, ‘यह तो बड़ा बुरा संदेश है। तुम मुझे तुरंत चंद्रमा के पास ले चलो। मैं उनसे अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करूंगा।’

खरगोश गजराज को चंद्रमा के पास ले जाने के लिए तैयार हो गया। उसने कहा, ‘मैं तुम्हें चंद्रमा के पास ले चल सकता हूं, पर शर्त यह है कि तुम अकेले ही चलोगे।’ गजराज ने खरगोश की बात मान ली।

पूर्णिमा की रात थी। खरगोश गजराज को लेकर झील के किनारे गया। उसने गजराज से कहा, ‘गजराज, मिलो चंद्रमा से ‘ खरगोश ने झील के पानी की ओर संकेत किया। पानी में पूर्णिमा के चंद्रमा की परछाईं को ही चंद्रमा मान लिया।

गजराज ने चंद्रमा से क्षमा मांगने के लिए अपनी सूंड पानी में डाल दी। पानी में लहरें पैदा हो उठीं, परछाईं अदृश्य हो गई। गजराज बोल उठा, ‘दूत, चंद्रमा कहां चले गए ?’

खरगोश ने उत्तर दिया, ‘चंद्रमा तुमसे नाराज हैं। तुमने झील के पानी को अपवित्र कर दिया है । तुमने खरगोशों की जान लेकर पाप किया है इसलिए चंद्रमा तुमसे मिलना नहीं चाहते।’

गजराज ने खरगोश की बात सच मान ली । उसने डर कर कहा, ‘क्या ऐसा कोई उपाय है, जिससे चंद्रमा मुझसे प्रसन्न हो सकते हैं?’

खरगोश बोला ‘हां, है। तुम्हें प्रायश्चित करना होगा। तुम कल सवेरे ही अपने झुंड के हाथियों को लेकर यहां से दूर चले जाओ। चंद्रमा तुम पर प्रसन्न हो जाएंगे।’ गजराज प्रायश्चित करने के लिए तैयार हो गया। वह दूसरे दिन हाथियों के झुंड सहित वहां से चला गया।

इस तरह खरगोश की चालाकी ने बलवान गजराज को धोखे में डाल दिया और उसने अपनी बुद्धिमानी के बल से खरगोशों को मृत्यु के मुख में जाने से बचा लिया।

-Stories from the Panchatantra

Photo By:
Submitted by: देवसुत
Submitted on: Wed Jan 29 2014 22:52:19 GMT+0530 (IST)
Category: Ancient Wisdom
Language: हिन्दी/Hindi

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तनहाई (Tanhai) -AnilBhatti (AB)


This Hindi poem is a conversation between man and God where man feels lonely as he hasn’t been able to see God or to overcome his hurdles in this world. He feels that he’s the most vulnerable thing in this cruel world and firstly he blames God who sent him on this planet and that too lonely. But later he realizes his weakness, his mistakes and requests God for his forgiveness.

तनहाई के समन्दर में डूब सा गया हूं मैं
ना जाने खुद को कहां खो बैठा हूं मैं
इस क़दर मार पड़ेगी तेरी ऐ ज़ालिम सोचा ना था
खुदी को तलाश्ता रहा और तुझसे जुदा हो गया हूं मैं

फंस गया हूं इस चार-दीवारी मे, अब कुछ कर नही सकता
जकड़ लिया इन ज़ंजीरों ने, अब तो मर भी नही सकता
टूट गया हूं अंदर से, बस एक पुतला ही बाकी है
निकल आया हूं दूर तुझसे इतना, अब वापस मुड़ भी नही सकता

मत आज़मा मुझे, मुझमे वो बात नही
लड़ सकुं तुझसे , मेरी वो औकात नही
माना मैं नादान हूं, पर तू तो खुद कादिर है
इस क़दर फ़ासले ना बढ़ा, पता तेरा मुझे मालूम नही

कर सकता है तो कर दे जंग का एलान, दिखा मुझे कितना ताकतवर है तू
बीच खड़ा हूं मैदान मे, मरने का अब कोई डर नही

आज भी याद है मुझे वो हर एक पल जिन्हें मैं याद करना नही चाहता
भूल सकता तो भूल जाता पर भूलना भी नही चाहता
इस कदर ताज़ा है उन लम्हों के ज़ख्म के हर एक लम्हा चीर के गुजरता है
कितनी भी कोशिश कर लूँ बच नही सकता वज़ूद मेरा यूँही भिखरता है

तू जानता है इस मर्ज़ की दवा क्या है, तू जानता है क्यूं मैं दर-बदर हूँ
जब ये सारा आलम ही तेरा है, तो फिर क्यूं तू मुझे मोहताज करता है

सुना था मैने किस्से कहानियों मे, एक मसीहा आता है
हद्द गुज़र जाये जब ज़ुल्मो की, वो इंसाफ करता है
जब तपिश बढ़ती दिलों मे, आग वो ही बुझाता है
चाहे कितने भी घहरे हों ज़ख्म, वो मरहम लगता है

ना जाने मेरी इस कहानी मे तू कब आयेगा
भड़क रहे अंगारे दहक रही रूह को कब बचायेगा
एक समा गुज़र चुका तेरी राह तकते तकते
मेरी डूबती हुई कश्ती को कब पार लगायेगा

टूट चुका है मेरे ख्वाबों का आशियाना, कहीं कुछ नज़र नही आता
सूख गया है मेरे अरमानों का पौधा, अब कुछ समझ नही आता
पागल सा जानते हैं लोग मुझे, दरकिनार हर कोई करता है
कभी इस दर कभी उस दर हर दरों से दूर, हर कोई मुझसे डरता है

इस भयानक बवण्डर से दुनिया की ज़लालत से तू कब मुझे बचायेगा
ना जाने मेरी इस कहानी मे तू कब आयेगा

पर फिर एक ख्याल ज़हन मे आता है के तू हर चीज़ से वाक़िफ है
तुझे इल्म है अपने बन्दों का तू हर नज़र मे हाज़िर है
मैं जो भी हूँ ये सब तेरी ही इनायत है
रहमतें तो तेरी तमाम हैं मेरी झोली ही काफिर है

बस फर्क है तो नज़रिया बदलने भर का है
तू कल भी यहीं था तू आज भी हाज़िर है
इश्क़ हक़ीकी की समझ नहीं मुझे, मेरा ज़मीर ही कुछ इस कदर नादिर है

गलतियों का पुतला हूँ मैं, इल्ज़ाम सारे तुझ पर हैं
गर तू ना बख़्शता मुझे फिर ये क़फन ही मेरी चादर है
पर एक बात ज़हन मे रखना, तुझे पाने के काबिल हूं मैं मरने के लायक नही
***
-AB
-AnilBhatti (AB)

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Submitted by: AnilBhatti (AB)
Submitted on: Thu Dec 19 2013 13:38:49 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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शाम सुंदरी -Shashank ‘Ravi’


शाम सुंदरी

मन सुन्दर औ’ तन से सुंदरी
सेज बिछो फूलों की
के शाम सुंदरी आई है.
तन मटमैला, मन उजियाला,
वोह नर्म लालिमा लायी है.

है रंग सांवली बाला सा,
जैसे हो मिलन दो घड़ियों का.

एक घडी हो जिसमें धूप प्रखर,
संग किरणों के आताप बहे,
और एक घडी जो कोमलता से,
मध्यम-मध्यम राग कहे.

परिधान में ओढ़े है हर रंग,
नित पंछी इसका अलंकार,
हैं चहों दिशाओं से उड़ते,
करें गा-गाकर इसका सत्कार.

दिन के घटनाक्रम की नाभि में,
बसी हुई कस्तूरी सी,
जिस प्रेम-मधु को प्रियजन तरसें,
वह मदिरा ले आई है.
एक शाम सुंदरी आई है.

पथिक के तन की पीड़ा हरती,
कवि हृदय को व्याकुल करती,
इधर-उधर इठलाती चलती,
स्वयं रति अंगडाई है,
एक शाम सुंदरी आई है.

– शशांक
-Shashank ‘Ravi’

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Submitted by: Shashank ‘Ravi’
Submitted on: Sat Nov 23 2013 09:23:06 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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बीमार इस लाइलाज के फ़क़त एक हम नहीं. -विद्रोही भिक्षुक


बीमार इस लाइलाज के फ़क़त एक हम नहीं.

निशानात पांवों के दो दर्ज हैं,
सहरा में अकेले हम ही हम नहीं.

हवाएं औसत से ज्याद गर्म हैं,
ये आहें हमारी अकेले नहीं.

बात तुम खूब कहते थे, कहते हो, कहते रहोगे,
चुप रहना यूँ हमारी भी फितरत नहीं.

न ओढ़न, न बालों, न पैरहन का सलीका,
सामाँ हमारे भी बिखरे कम नहीं.

ये छुप के रो लिए, वो मुंह धो के सो सो लिए,
पलकें हमारी भी कुछ कम नम नहीं.

हकीकत में ही जिला सकता तो तसवीरें बनाता क्यों खुदा,
खरीदार ख्वाबों के भी कुछ कम नहीं.

नज़्म लिखते हम हैं, पढ़ते तुम हो, बिकने दूर तक जाती हैं,
बीमार इस लाइलाज के फ़क़त एक हम नहीं
-विद्रोही भिक्षुक

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Submitted by: विद्रोही भिक्षुक
Submitted on: Tue Oct 29 2013 22:13:28 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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अभी बाकी है -विद्रोही भिक्षुक


अभी बाकी है

कुछ कह रही है ये हवा रोज़ की तरह,
कहीं किसी कोने में फिर याद सी जागी है।

तेरा साथ न होने का कोई गिला नहीं,
पर तेरी दूरी का एहसास अभी बाकी है।

तुम भी देखते हो छिप-छिप कर, छिपाता नहीं है परदा,
सिलवटें कह रही हैं, इस बार तू झाँकी है।

यहाँ तो ज़िन्दगी चलती है अपनी चाल से तेज़,
वहाँ तेरी रफ़्तार का अन्दाज़ अभी बाकी है।

यूँ तो तोड़ रखी हैं सारी चहारदीवारियाँ,
पर हवा की वो हल्की सी दीवार अभी बाकी है।

दिख जाते हो तुम, फिर हो जाते हो गुम,
पर रात कह रही है, कुछ बात अभी बाकी है।

कुछ न बोलोगे तुम सब जान जाऊँगा मैं,
ख़ामोशी कह रही है, अल्फ़ास अभी बाकी है।

झूठ कहती है दुनिया कि मुझे मौत आ गई है,
मैं जानता हूँ मैं जिन्दा हूँ, के तेरे सीने में कुछ साँस अभी बाकी है।
-विद्रोही भिक्षुक

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Submitted by: विद्रोही भिक्षुक
Submitted on: Tue Oct 29 2013 22:09:37 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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हिन्दी मुहवरे – 3 -देवसुत


-1-
मछली के बच्चे को तैरना कौन सिखाता है

अर्थः गुण जन्मजात आते हैं।

-2-
मजनू को लैला का कुत्ता भी प्यारा

अर्थः प्रेयसी की हर चीज प्रेमी को प्यारी लगती है।

-3-
मतलबी यार किसके, दम लगाया खिसके

अर्थः स्वार्थी व्यक्ति को अपना स्वार्थ साधने से काम रहता है।

-4-
मन के लड्ड़ओं से भूख नहीं मिटती

अर्थः इच्छा करने मात्र से ही इच्छापूर्ति नहीं होती।

-5-
मन चंगा तो कठौती में गंगा

अर्थः मन की शुद्धता ही वास्तंविक शुद्धता है।

-6-
मरज़ बढ़ता गया ज्यों- ज्यों इलाज करता गया

अर्थः सुधार के बजाय बिगाड़ होना।

-7-
मरता क्या न करता

अर्थः मजबूरी में आदमी सब कुछ करना पड़ता है।

-8-
मरी बछिया बाभन के सिर

अर्थः व्यर्थ दान।

-9-
मलयागिरि की भीलनी चंदन देत जलाय

अर्थः बहुत अधिक नजदीकी होने पर कद्र घट जाती है।

-10-
माँ का पेट कुम्हार का आवा

अर्थः संताने सभी एक-सी नहीं होती।

-11-
माँगे हरड़, दे बेहड़ा

अर्थः कुछ का कुछ करना।

-12-
मान न मान मैं तेरा मेहमान

अर्थः ज़बरदस्ती का मेहमान।

-13-
मानो तो देवता नहीं तो पत्थर

अर्थः माने तो आदर, नहीं तो उपेक्षा।

-14-
माया से माया मिले कर-कर लंबे हाथ

अर्थः धन ही धन को खींचता है।

-15-
माया बादल की छाया

अर्थः धन-दौलत का कोई भरोसा नहीं ।

-16-
मार के आगे भूत भागे

अर्थः मार से सब डरते हैं।

-17-
मियाँ की जूती मियाँ का सिर

अर्थः दुश्मन को दुश्मन के हथियार से मारना।

-18-
मिस्सों से पेट भरता है किस्सों से नहीं

अर्थः बातों से पेट नहीं भरता।

-19-
मीठा-मीठा गप, कड़वा-कड़वा थू-थू

अर्थः मतलबी होना।

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Submitted by: देवसुत
Submitted on: Sat Mar 09 2013 09:37:20 GMT+0530 (IST)
Category: Ancient Wisdom
Language: हिन्दी/Hindi
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हिन्दी मुहवरे – 2 -देवसुत


-1-
मुँह में राम बगल में छुरी

अर्थः ऊपर से मित्र भीतर से शत्रु।

-2-
मुँह माँगी मौत नहीं मिलती

अर्थः अपनी इच्छा से कुछ नहीं होता।

-3-
मुफ्त की शराब काज़ी को भी हलाल

अर्थः मुफ्त का माल सभी ले लेते हैं।

-4-
मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक

अर्थः सीमित दायरा।

-5-
मोरी की ईंट चौबारे पर

अर्थः छोटी चीज का बड़े काम में लाना।

-6-
म्याऊँ के ठोर को कौन पकड़े

अर्थः कठिन काम कोई नहीं करना चाहता।

-7-
यह मुँह और मसूर की दाल

अर्थः औकात का न होना।

-8-
रंग लाती है हिना पत्थर पे घिसने के बाद

अर्थः दु:ख झेलकर ही आदमी का अनुभव और सम्मान बढ़ता है।

-9-
रस्सी जल गई पर ऐंठ न गई

अर्थः घमण्ड का खत्म न होना।

-10-
राजा के घर मोतियों का अकाल?

अर्थः समर्थ को अभाव नहीं होता।

-11-
रानी रूठेगी तो अपना सुहाग लेगी

अर्थः रूठने से अपना ही नुकसान होता है।

-12-
राम की माया कहीं धूप कहीं छाया

अर्थः कहीं सुख है तो कहीं दुःख है।

-13-
राम मिलाई जोड़ी, एक अंधा एक कोढ़ी

अर्थः बराबर का मेल हो जाना।

-14-
राम राम जपना पराया माल अपना

अर्थः ऊपर से भक्त, असल में ठग।

-15-
रोज कुआँ खोदना, रोज पानी पीना

अर्थः रोज कमाना रोज खाना।

-16-
रोगी से बैद

अर्थः भुक्तभोगी अनुभवी हो जाता है।

-17-
लड़े सिपाही नाम सरदार का

अर्थः काम का श्रेय अगुवा को ही मिलता है।

-18-
लड्डू कहे मुँह मीठा नहीं होता

अर्थः केवल कहने से काम नहीं बन जाता।

-19-
लातों के भूत बातों से नहीं मानते

अर्थः मार खाकर ही काम करने वाला।

-20-
लाल गुदड़ी में नहीं छिपते

अर्थः गुण नहीं छिपते।

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Submitted by: देवसुत
Submitted on: Sat Mar 09 2013 09:33:29 GMT+0530 (IST)
Category: Ancient Wisdom
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हमारी यह तू तू मैं मैं -देवसुत


ये तू तू मैं मैं क्या लगा रखा है?
तू तू है मैं मैं हूं
तू मैं है मैं तू हूं ।
तेरा दर्द मुझे ज्यादा होता है,
मेरा दर्द क्या तुझे नहीं?
गिरता तू है, देख – चोट मुझे है,
रोता तू है, आँसू मेरे हैं,
हँसी तेरी, खुशी मेरी है,
क्या मेरी खुशी तेरी हँसी नहीं?
आत्मा का मुझे पता नहीं,
तू मैं है मैं तू हूं,
मेरे लिए बस यही काफ़ी है ।
-देवसुत

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Submitted by: देवसुत
Submitted on: Tue Oct 01 2013 17:34:43 GMT+0530 (IST)
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समय -amalik


भविष्य का भय हो, या भूत का भूत
डरते हैं सभी, सपूत और कपूत .
पर समय तो पानी है, रोके नहीं रुकता , हवा है बंधे नहीं बंधता,
समय तो है मूर्खों के पास धन, कब खर्च हो पता नहीं लगता .
घड़े से पानी बूँद-बूँद कर रिसॆ, तब ही पता लगाओ तुम,
शिव को करो अर्पण या प्यासे की प्यास बुझाओ तुम .
क्यों जीते हो, कभी सोचा – देखा है ?
क्या धन दौलत, ऐश्वर्य , यही हमारी सीमा रेखा है ?
– -amalik

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Original Quote, Tue Oct 01 2013 16:37:12 GMT+0530 (IST) -देवसुत


-1-
बोए पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय |
Hindi Meaning:
जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल मिलेगा |

English Translation of Hindi Proverb:
Sowing a babool seed does not yield a mango tree.

Equivalent English Proverb:
You reap what you sow.

-2-
डूबते को तिनके का सहारा |

Hindi Meaning:
मुसीबत में पड़ा व्यक्ति उससे निकलने का हर एक प्रयास करता है |

English Translation of Hindi Proverb:
Drowning man seeks support even from straw.

Equivalent English Proverb:
A drowning man will clutch at a straw.

-3-
सांच को आंच क्या |

Hindi Meaning:
जो सच्चा होता है उसे किसी बात का डर नहीं होता है |

English Translation of Hindi Proverb:
Truth is not affected by fire.

Equivalent English Proverb:
-None-

-4-
ऊंची दूकान फीके पकवान |

Hindi Meaning:
देखने में महंगा पर सस्ता सामान |

English Translation of Hindi Proverb:
Good looking shop, but bad quality food.

Equivalent English Proverb:
-None-

-4-
नाम बड़े और दर्शन छोटे |

Hindi Meaning:
नाम बडा होने से काम बडा नहीं होता |

English Translation of Hindi Proverb:
High status, low standing.

Equivalent English Proverb:
-None-

-5-
मूर्ख के आगे रोए अपने नैन खोए |

Hindi Meaning:
किसी मूर्ख को अपनी बात समझाना |

English Translation of Hindi Proverb:
Trying to reason with a fool.

Equivalent English Proverb:
-None-

-देवसुत

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Proverb Tue Oct 01 2013 07:33:15 GMT+0530 (IST) -Hari


Hindi Quote 1: ओस चाटने से प्यास नहीं बुझती |

English Translation: Licking the fog does not quell the thirst.

English Equivalent: Half an effort yields no result. (By Harekrishna Acharya)

Hindi Meaning: बड़े काम के लिए बड़ा प्रयत्न करना पड़ता है |

Hindi Quote 2: कर बुरा तो होय बुरा |

English Translation: If you do bad things, bad things happen to you too.

English Equivalent: You reap what you sow.

Hindi Meaning: जो जैसा करता है उसके साथ वैसा ही होता है |

Hindi Quote 3: जैसी करनी वैसी भरनी |

English Translation: What you do, you get.

English Equivalent: You reap what you sow.

Hindi Meaning: जो जैसा करता है उसके साथ वैसा ही होता है |

Hindi Quote 4: आप भले तो जग भला |

English Translation: If you do good, the world is good to you.

English Equivalent: You reap what you sow.

Hindi Meaning: जो अच्छा करता है उसके साथ अच्छा होता है |

Hindi Quote 5: लालच बुरी बला |

English Translation: Greed brings bad.

English Equivalent: Avarice is the root of all evils.

Hindi Meaning:
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Category: Proverb
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जीवन की डगर -amalik



सुनसान अनजानी डगर है यह, काँटों भरी
पर मुझे न फिक्र है शूलों की न अंगारों की ।
कुछ लोगों को जाते देखा मैंने, चढ़ कर कुछ कन्धों पर
रौंदते कुछ सपनो को, कुचलते कुछ पांवों को
पर वो लोग भी ज्यादा दूर न जा पाएंगे ,
जो उन्हें सहारा देते हैं, इक दिन बोझ तले मर जायेंगे
तब कौन उन्हें पार कराएगा?
कातर आँखे , दया की भीख तब कुछ काम न आयेंगी,
खून से लथपथ पाँव जिस दिन अगला कदम बढ़ाएगा,
याद रखना दोस्तों, ये इतिहास
नया लिखा जायेगा |
– -amalik

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चंदा मामा दूर के -देवसुत Sat Oct 05 2013 17:02:15 GMT-0700 (PDT)


चंदा मामा दूर के,
पुए पकाए बूर के,
आप खाएं थाली में,
मुन्ने को दें प्याली में,
प्याली गई टूट,
मुन्ना गया रूठ,
नयी प्याली लायेंगे,
मुन्ने को हसायेंगे,
तालियाँ बजाएंगे |

-बाल कविता (Children’s Poem)
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पोषम पा -देवसुत Sat Oct 05 2013 17:02:10 GMT-0700 (PDT)


पोषम पा भई पोषम पा,
डाकिये ने क्या किया,
सौ रूपए की घडी चुराई,
अब तो जेल में जाना पडेगा,
जेल की रोटी खानी पड़ेगी,
जेल का पानी पीना पड़ेगा,
अब तो जेल में जाना पड़ेगा |

– बाल कविता (Children’s Poem)
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मछली जल की रानी है -देवसुत Sat Oct 05 2013 17:02:05 GMT-0700 (PDT)


मछली जल की रानी है,
जीवन उसका पानी है,
हाथ लगाओ डर जाएगी,
बाहर निकालो मर जाएगी |

-बाल कविता (Children’s Poem)
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बुरा हूँ मैं -Aditya Tue Oct 01 2013 17:02:16 GMT-0700 (PDT)


बुरा नेता नहीं , बुरा हूँ मैं ।
जल नहीं , बिजली नहीं , भूखे सो लेता हूँ मैं ।
बुरा नेता नहीं , बुरा हूँ – मैं ।
वोट देता ही नहीं , जल बिजली और पानी पे।
वोट देता हूँ बस , मंदिर – मस्जिद और जाति पे ।
बुरा नेता नहीं , बुरा हूँ – मैं ।
तमिल – बंगला और मराठी , इनपे वोट देता हूँ मैं ।
बुरा नेता नहीं , बुरा हूँ – मैं ।
भ्रष्टाचारी , आतंकी तू नहीं , काला धन तेरा नहीं ।
वोट खरीदता तू नहीं , वोट बेचता हूँ मैं ।
इसलिए बुरा तू नहीं , बुरा हूँ – मैं ।।
-Aditya

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Proverb Tue Oct 01 2013 07:15:03 GMT+0530 (IST) -Hari


Hindi Quote 1: जिसकी लाठी उसकी भैंस |
English Translation of Hindi Quote: Who owns the stick owns the buffalo.

English Equivalent: Might is right.

Hindi Meaning: ताकतवर की ही बात माननी पड़ती है।

Hindi Quote 2: थोथा चना बाजे घना |

English Translation of Hindi Quote: Hollow horse gram makes more sound.

English Equivalent: Empty cans make more noise.

Hindi Meaning: जिसको कम ज्ञान होता है वो दिखावे के लिए अधिक बोलता है।

Hindi Quote 3: अधजल गगरी छलकत जाय |

English Translation of Hindi Quote: Half filled pot splashes more.

English Equivalent: Empty cans make more noise.

Hindi Meaning: जिसको कम ज्ञान होता है वो दिखावे के लिए अधिक बोलता है ।

Hindi Quote 4: चोर – चोर मौसेरे भाई |

English Translation of Hindi Quote: Thieves are cousin brothers.

English Equivalent: Birds of the same feather flock together.

Hindi Meaning: एक चोर दूसरे चोर की सहायता करता है |

Hindi Quote 5: एक ही थाली के चट्टे-बट्टे |

English Translation of Hindi Quote: Front and back of the same plate.

English Equivalent: Two sides of the same coin.

Hindi Meaning: एक जैसे लोग एक साथ रहते हैं |

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Category: Proverb
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तस्वीरें -देवसुत Sun Sep 22 2013 17:02:04 GMT-0700 (PDT)


मैंने एक तस्वीर खींची अभी
देखा कुछः लंगड़े लूले, कुछः खाते पीते,
कुछः सुखी हंस्ते, कुछः दुखी रोते।

पूछा मैंने खुद से तभी,
जब हैं ऊपर वाले के सब प्यारे,
तब क्यूं है सब ऐसे,
कुछः लंगड़े लूले, कुछः खाते पीते?
कुछः सुखी हंस्ते, कुछः दुखी रोते?

तभी मन में एक बात उठी,
और मैंने एक तस्वीर फिर खींची।
गौर से देखा तो बात कुछ हज़म हुई।

रोते बिलखते दिखे खाते पीते,
हँसी खुशी थे लंगड़े लूले।
समझ में आया तभी,
ऊपर वाले के हैं सब प्यारे,
सुख और दुख, सुखी और दुखी।

इस समझ से मैंने एक और तस्वीर फिर खींची।

-देवसुत

Submitted on: Sun Sep 22 2013 05:01:07 GMT-0700 (PDT)
Category: Original
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भगवान -जिज्ञासु Sun Sep 22 2013 05:01:44 GMT-0700 (PDT)


भगवान !
कहीं बैठा है जो तू मजे से
कभी हो समय तो जरा
नीचे आकर देख अपने बच्चों को
जिनपर थोपी गयी है तुम्हारी मर्जी
कैसे विवश हैं जीने को
क्यूँ इतनी विषमताएं
कर रखी हैं व्याप्त ?
जब तू कहता है
सभी तेरे प्यारे हैं ?
क्यूँ देता है किसी को
रोटी के लाले
क्यूँ कहीं कोठियाँ अनाजों से
भरी होती है…
कोई उड़ता है वातानुकूलित
मोटरों मे
किसी को पैरों से भी
वंचित कर देता है…
अब
या तो तू आकर अपना
सामर्थ्य सिद्ध कर
या फिर पालनहार बनने का
स्वांग त्याग दे
फिर हम भी तुझे छोड़कर
अपने-अपने हिस्से के
भगवान खुद बन जाएंगे|
-जिज्ञासु

Submitted on: Fri Sep 20 2013 13:33:01 GMT-0700 (PDT)
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आ়र्जू -आ়जाद Mon Aug 19 2013 18:16:27 GMT-0700 (PDT)


तुम तो हो छोटे बचपना है तुम्हारा,
जीवनभर तुम खुश रहो यह अपसना है हमारा,
रेगिस्तान की धूप मे तुम बन जाना सरोवर,
यही तो होगी तुम्हारे आपनों की धरोहर,
सूरत तुम्हारी होगी सारे जग से मनोहर,
बसने आए तुम्हारे साथ जगत का ईश्वर,
कुछ नहीं माँगा प्रभु से करता हू अरज,
सब हঁसते रहे हঁसाते रहे यही मेरा अरमान,
कोई न रूठे , साथ न छूटे हঁसाते रहो हमेशा,
बहुत दूर से भी याद करेगा तुम्हें, तुम्हारा “विवेक” |

-आ়जाद

Submitted on: Wed Aug 07 2013 05:32:46 GMT-0700 (PDT)
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Folklore Quote, Sun Jul 14 2013 07:58:35 GMT+0530 (IST) -देवसुत


कुकड़ू कू भई कुकड़ू कू,
कहे मुर्गा कुकड़ू कू,
उठो बच्चों आलस क्यूँ,
कुकड़ू कू भई कुकड़ू कू,
मुर्गा बोले कुकड़ू कू |

-Children’s Poem (बाल कविता)

Submitted by: देवसुत
Submitted on: Sun Jul 14 2013 07:58:35 GMT+0530 (IST)
Category: Folklore
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Non-original work with Acknowledgements Quote, Sun Jul 14 2013 07:21:43 GMT+0530 (IST) –


Quotes by Mother Teresa:

If you can’t feed a hundred people, then feed just one.

Hindi Translation of English Quote:
अगर आप सैंकड़ो इंसानों का पेट नहीं भर सकते तो केवल एक को भोजन दीजिये |

People are unrealistic; illogical, and self-centered. Love them anyway.

Hindi Translation of English Quote:
लोग अवास्तविक, विसंगत और आत्मा केन्द्रित होते हैं फिर भी उन्हें प्यार दीजिये |

If you judge people, you have no time to love them.

Hindi Translation of English Quote:
अगर आप यह देखेंगे की लोग कैसे हैं तो आप के पास उन्हें प्रेम करने का समय नहीं मिलेगा.

Discipline is the bridge between goals and accomplishment.

Hindi Translation of English Quote:
अनुशासन लक्ष्यों और उपलब्धि के बीच पुल है |

Live simply so others may simply live.

Hindi Translation of English Quote:
सादगी से जिए ताकि दूसरे भी जी सकें |

Jesus said love one another. He didn’t say love the whole world.

Hindi Translation of English Quote:
यीशु ने कहा है की एक दूसरे से प्रेम करो. उन्होंने यह नहीं कहा की समस्त संसार से प्रेम करो |

I think it is very good when people suffer. To me that is like the kiss of Jesus.

Hindi Translation of English Quote:
मुझे लगता है हम लोगो का दुखी होना अच्छा है, मेरे लिए यह यीशु के चुम्बन की तरह है |

What you spend years building may be destroyed overnight; build it anyway.

Hindi Translation of English Quote:
जो आपने कई वर्षों में बनाया है वह रात भर में नष्ट हो सकता है तो भी क्या आगे बढिए उसे बनाते रहिये |

How can there be too many children? That is like saying there are too many flowers.

Hindi Translation of English Quote:
“ज्यादा बच्चे” कैसे हो सकते हैं ? यह तो बहुत सारे फूलों की तरह हैं |

It’s not how much we give but how much love we put into giving.

Hindi Translation of English Quote:
यह महत्वपूर्ण नहीं है आपने कितना दिया, बल्कि यह है की देते समय आपने कितने प्रेम से दिया |

I prefer you to make mistakes in kindness than work miracles in unkindness.

The trees, the flowers, the plants grow in silence. The stars, the sun, the moon move in silence. Silence gives us a new perspective.

Hindi Translation of English Quote:
पेड़, फूल और पौधे शांति में विकसित होते हैं, सितारे, सूर्य और चंद्रमा शांति से गतिमान रहते हैं, शांति हमें नयी संभावनाएं देती है |

We cannot all do great things, but we can do small things with great love.

Hindi Translation of English Quote:
हम सभी महान कार्य नहीं कर सकते लेकिन हम अन्य कार्यों को प्रेम से कर सकते हैं |

Everything that is not given is lost.

Hindi Translation of English Quote:
प्रत्येक वस्तु जो नहीं दी गयी है खो चुकी है |

Love begins by taking care of the closest ones – the ones at home.

Hindi Translation of English Quote:
प्रेम की शुरुआत निकट लोगो और संबंधो की देखभाल और दायित्व से होती है, वो निकट सम्बन्ध जो आपके घर में हैं |

Peace begins with a smile.

Hindi Translation of English Quote:
शान्ति का आरम्भ मुस्कराहट से होता है |

We are all pencils in the hand of God.

Hindi Translation of English Quote:
हम सभी ईश्वर के हाथ में एक कलम के सामान है |

I do not pray for success, I ask for faithfulness.

Hindi Translation of English Quote:
मैं सफलता के लिए प्रार्थना नहीं करता मैं सच्चाई के लिए करता हूँ |

A life not lived for others is not a life.

Hindi Translation of English Quote:
एक जीवन जो दूसरों के लिए नहीं जीया गया वह जीवन नहीं है |

I’m a little pencil in the hand of a writing God, who is sending a love letter to the world.

Hindi Translation of English Quote:
मैं एक छोटी पेंसिल के समान हूँ जो ईश्वर के हाथ में है जो इस संसार को प्रेम का सन्देश भेज रहे हैं |

Love is a fruit in season at all times and within reach of every hand.

Hindi Translation of English Quote:
प्रेम हर ऋतू में मिलने वाले फल की तरह है जो प्रत्येक की पहुँच में है |

do not wait for leaders;do it alone, person to person.

Hindi Translation of English Quote:
किसी नेता की प्रतीक्षा मत करो, अकेले करो, व्यक्ति से व्यक्ति द्वारा |

Words which do not give the light of Christ increase the darkness.

Hindi Translation of English Quote:
वे शब्द जो ईश्वर का प्रकाश नहीं देते अँधेरा फैलाते हैं |

Work without love is slavery.

Hindi Translation of English Quote:
बिना प्रेम के कार्य करना दासता है |

One of the greatest diseases is to be nobody to anybody.

Hindi Translation of English Quote:
सबसे बड़ा रोग किसी के लिए भी कुछ न होना है |

Prayer in action is love, love in action is service.

Hindi Translation of English Quote:
कार्य में प्रार्थना प्यार है, कार्य में प्यार सेवा है |

Be faithful in small things because it is in them that your strength lies.

Hindi Translation of English Quote:
छोटी छोटी बातों में विश्वासयोग्य रहो क्योंकि यह उन में ही आपकी शक्ति निहित है |

Kind words can be short and easy to speak, but their echoes are truly endless.

Hindi Translation of English Quote:
दया और प्रेम भरे शब्द छोटे हो सकते हैं लेकिन वास्तव में उनकी गूँज अनन्त होती है |

Loneliness and the feeling of being unwanted is the most terrible poverty.

Hindi Translation of English Quote:
अकेलापन और किसी के द्वारा न चाहने की भावना का होना भयानक गरीबी के सामान है |

What can you do to promote world peace? Go home and love your family.

Hindi Translation of English Quote:
आप दुनिया में प्रेम फ़ैलाने के लिए क्या कर सकते हैं ? घर जाइये और अपने परिवार से प्रेम कीजिये |

Life is an opportunity, benefit from it.
Life is beauty, admire it.
Life is a dream, realize it.
Life is a challenge, meet it.
Life is a duty, complete it.
Life is a game, play it.
Life is a promise, fulfill it.
Life is sorrow, overcome it.
Life is a song, sing it.
Life is a struggle, accept it.
Life is a tragedy, confront it.
Life is an adventure, dare it.
Life is luck, make it.
Life is too precious, do not destroy it.
Life is life, fight for it.

Hindi Translation of English Quote:
जिंदगी एक अवसर है इससे लाभ उठाइए
ज़िन्दगी खूबसूरत है, इसकी प्रशंसा कीजिये
ज़िन्दगी एक ख्वाब है, इसका एहसास कीजिये
ज़िन्दगी एक चुनौती है इसे स्वीकार कीजिये
ज़िन्दगी एक कर्त्तव्य है इसे पूरा कीजिये
ज़िन्दगी एक खेल है इसे खेलिए
ज़िन्दगी एक वादा है इसे पूरा कीजिये
ज़िन्दगी एक दुःख है इस से उबारिये
ज़िन्दगी एक गीत है इसे गाईये
ज़िन्दगी एक संघर्ष है इसे स्वीकार कीजिये
ज़िन्दगी एक त्रासदी है इसका सामना कीजिये
ज़िन्दगी एक साहसिक यात्रा है इसे पूरा कीजिये
ज़िन्दगी एक भाग्य है इसे अपना बनाइये
ज़िन्दगी बहुत कीमती है इसे बर्बाद मत कीजिये
ज़िन्दगी ज़िन्दगी है इसके लिए लड़ते रहिये |

I want you to be concerned about your next door neighbor. Do you know your next door neighbor?

Hindi Translation of English Quote:
मैं चाहता हूँ की आप अपने पडोसी के लिए भी चिंतित हों, क्या आप जानते हैं की आपका पडोसी है कौन ?

Yesterday is gone. Tomorrow has not yet come. We have only today. Let us begin.

Hindi Translation of English Quote:
कल जा चुका है, कल अभी आया नहीं है, हमारे पास केवल आज है, चलिए शरुआत करते हैं |

Let us always meet each other with smile, for the smile is the beginning of love.

Hindi Translation of English Quote:
चलिए जब भी एक दूसरे से मिलें मुस्कान के साथ मिलें, यही प्रेम की शुरुआत है |

Let us not be satisfied with just giving money. Money is not enough, money can be got, but they need your hearts to love them. So, spread your love everywhere you go.

Hindi Translation of English Quote:
केवल धन देने भर से संतुष्ट न हों, धन पर्याप्त नहीं है, वह पाया जा सकता है लेकिन उन्हें आपके प्रेम की आवश्यकता है, तो जहाँ भी आप जायें अपना प्रेम सबमे बांटे|

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Proverb Sun Jul 14 2013 07:08:21 GMT+0530 (IST) -देवसुत


पैसे से ही पैसा बनता है |

English Translation of Hindi Quote:
Money makes money.
Submitted by: देवसुत
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Category: Proverb
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बन्दर गया ससुराल -देवसुत Wed Jul 31 2013 17:02:06 GMT-0700 (PDT)


लाठी लेकर बीन बजाता,
बन्दर जा पहुंचा ससुराल |
मैं आया बन्दर को लेने,
कौन पकाए रोटी-दाल |
सुन कर बंदरी आई बाहर,
पहले लाओ हीरों का हार |

-बाल कविता (Children’s Poem)

Submitted by: देवसुत
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चुन्नू मुन्नू थे दो भाई – Thu Jul 25 2013 22:51:20 GMT-0700 (PDT)


चुन्नू मुन्नू थे दो भाई,
रसगुल्ले पर हुई लड़ाई…
चुन्नू बोला मैं खाऊंगा,
मुन्नू बोला मैं खाऊंगा..
हल्ला सुन कर मम्मी आई,
दोनों को एक चपत लगाई,
कभी न लड़ना,
कभी न झगड़ना,
आपस में तुम मिलकर रहना |

-बाल कविता (Children’s Poem)
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बिल्ली चूहा भाई बन्दर -देवसुत Thu Jul 25 2013 22:32:07 GMT-0 700 (PDT)


बिल्ली चूहा भाई बन्दर,
बैठे थे एक कमरे के अन्दर,
बिल्ली बोली म्याऊं,
चूहा बोला बिल में जाऊं,
इतने में आया एक भालू,
बोला मैं तुम सबको खालूं,
लेकिन तीनो थे चालाक,
पकड़ी भालू की झट से नाक,
नाक पकड़ कर खूब घुमाया,
भालू ने फिर नहीं सताया |

-बाल कविता (Children’s Poem)
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अनकही -BaBa Thu Jul 25 2013 22:17:14 GMT-0700 (PDT)


कशमकश की वो तीव्र लहरें,
मेरी नाँव की पाल पर अतीत की,
हार का वो हिलोरा अब भी तटस्थ,
मगर कदम जब पड़े सत्य के,
धरातल की भूमि पर तो पाया,
एक अथाह शून्य…
शून्य जहाँ फैली है एक खामोशी,
हवाओं के शोर में दबा सा एक क्रंदन,
रोजमर्रा की जिंदगी के शोर का,
जो चाहता है पैमानों को तोड़,
बाहर झाँकना, अनकही सुनाना मगर,
बेबसी है शायद, तो खामोश है…
मैं चल पड़ा इस शून्य पर,
कशमकश की लहरों को पीछे छोड़,
पाल के हिलोरों से कहीं दूर,
तो पायी ये पतली सी एक तंग गली,
देखा की शहर सो रहा है,
कई मकानों से पटा एक शहर…
साएँ साएँ सी हवा तो है मगर,
एक खामोश अनकही दबी सी है,
शायद शहर के हृदय की पीड़ा,
मेरे कदम ना रुके , ना रुकने की चाहत,
एक मोड़ पर खुली थी खिड़की तो झाँक लिया,
मैं हैरान तटस्थ, और शहर का भीषण अट्टहास…
शहर तो है मगर हर मकान में,
सिमटा खुद का एक शहर,
रहने वालों की हँसी या आँसू,
कारण हर मकान का अपना शहर,
तब जानी शहर की मायूसी, क्रंदन,
एक अनकही की थी वो भीषण अट्टहास…
मैं मुसाफिर चलता रहा,
शहर को पीछे छोड़,
एक नये तजुर्बे की तलाश,
मगर कानों पर अब भी,
शहर का अट्टहास तटस्थ, लग रहा,
मिलती हो मेरी अनकही भी शहर से…

-BaBa

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फसल की फाँसी -aditya Sun Jul 14 2013 18:23:38 GMT-0700 (PDT)


अब फिर , मॉनसून आया है ।
बुझ रही , धरती की ये आग ।
नदियाँ हँस रही , पोखरें नाच रहे ।
तितली उड़ रही , मेंढक गा रहे ।
फिर भी कोई रो रहा है , कह रहा है ।
अब आके क्या , जब फसल को हो गई फाँसी ।
अब तो भूख करेगी , मेरी वर्षा ।
फसल की फाँसी से होगी , अब मुझको फाँसी ।
-aditya

Submitted on: Sun Jun 09 2013 00:00:29 GMT-0700 (PDT)
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कर हिफ़ाजत -aditya Sun Jul 14 2013 18:23:33 GMT-0700 (PDT)


उठ जाग और बढ़
रायसीना के सीने पे
दहाड़ हिला के नींव
जगा दे मुकबीर को
दे बना कानून ऐसा
कर बहन की तू हिफाज़त
वो तो निकले रात मे भी
होसलों के तेरे बिना
साँस लेने के लिये
उसको ना हो तेरी ज़रूरत ।
-aditya

Submitted on: Sat Jun 08 2013 23:58:57 GMT-0700 (PDT)
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Proverb Sun Jul 14 2013 07:02:41 GMT+0530 (IST) -देवसुत


जो बोले वही कुण्डा खोले ।

English Translation of Hindi Quote:
One who gives the idea is the one who is made to implement it.
Submitted by: देवसुत
Submitted on: Sun Jul 14 2013 07:02:41 GMT+0530 (IST)
Category: Proverb
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Proverb Wed Jun 19 2013 22:18:56 GMT+0530 (IST) –


मूल से ब्याज प्यारा होता है ।

English Translation of Hindi Quote:
Interest is dearer than the Principal.
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Submitted on: Wed Jun 19 2013 22:18:56 GMT+0530 (IST)
Category: Proverb
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एक राही और उसकी मृग तृष्णा।। -Nikita Parik Fri Feb 15 2013 18 :54:06 GMT-0800 (PST)


भांति भांति का मनुष्य
हर मनुष्य में मनुष्य अनेक।
लोगों के इस बवंडर में फंसा ,
वो एक राही , और उसकी मृग तृष्णा …

भावनाओं का एक समुद्र विशाल,
समुद्र की बदलती दिशाएं हज़ार,
भावनाओं के इस सागर में खोया …
वो एक राही और उसकी मृग तृष्णा ।

ज़िन्दगी की रण -भूमि में
तलवार उठाये अपने ही खिलाफ।।
आदर्शों की लड़ाई में हारा ..
वो एक राही और उसकी मृग तृष्णा ।।

गुंजन स्वरों की हर दिशा में ,
स्वरों की उलझन खामोश राहों में ,
स्वरों के शब्दों में उलझता चला ,
वो एक राही और उसकी मृग तृष्णा ||
-Nikita Parik

Submitted on: Tue Feb 12 2013 00:52:35 GMT-0800 (PST)
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धिक्कारे हुये एक पथिक की अनकही महत्ता -Pri Sun Feb 10 2013 17:58:14 GMT-0800 (PST)


वो अकेला चला,
चलता रहा।
उसे न कुछ पाना था ,
न कुछ खोने को था रखा ।
अप्नत्व्य की तलाश में ,
बढ़ता चला , चलता गया।

चमकने की जो वो आस थी ,
तो चांदनी बन सकी वो ईद की ।
ईद की चाँद को तो सब तरसे ,
सबने टकटकी लगाये इंतज़ार किया ।
पर उसकी चांदनी की क्या बिसात ?
उसने भूमि के किसी कोने को न रोशन किया ,
न बधू की शोभा सजा सका ।

पोष की भोर की उस वर्षा सी ,
गिरता रहा …
जमीन को उसकी जरुरत नहीं ,
न मांगता था उसे आसमान ।
उसे स्वयं में समां कर ,
इक पंखुड़ी खिलती रही।
और वो बस अतिवृस्टि सी गिरता रहा।
-Pri

Submitted on: Sun Feb 10 2013 09:05:34 GMT-0800 (PST)
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Proverb Tue Jan 29 2013 09:42:59 GMT+0530 (IST) -देवसुत


नेकी कर, कुँए में फ़ेंक ।

English Translation of Hindi Proverb:
Do good, but do not expect returns.

Submitted by: देवसुत
Submitted on: Tue Jan 29 2013 09:42:59 GMT+0530 (IST)
Category: Proverb
Language: Hindi
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बनिया का पहाड़ा -देवसुत Mon Jan 28 2013 09:24:36 GMT-0800 (PST)


बनिया इक्कम बनिया ,
बनिया दूनी धनिया ,
बनिया तीया तेल ,
बनिया चौके चावल ,
बनिया पंजे पंजीरी ,
बनिया छक्के छुहारा ,
बनिया सत्ते सत्तू ,
बनिया अठ्ठे आटा ,
बनिया नौए नमक ,
बनिया दस्से, बनिया का तोंद ।

-Children’s Poem in Hindi-
Submitted by: देवसुत
Submitted on: Mon Jan 28 2013 07:37:13 GMT-0800 (PST)
Category: Folklore
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सब के सब चोर हैं -imrankhan


सूरमा जी हमारे पडोसी हैं। एक दिन उन्होंने हमें चाय पर बुलाया। सूरमा जी एक प्राइवेट फर्म में लिपिक के पद पर थे, लेकिन घर उन्होंने बड़ा अच्छा सजा रखा था। दो दो एयर कंडीशनर , गीजर ; वाह जी वाह! बातों ही बातों में राजनीती की चर्चा शुरू हुई, अरविन्द केजरीवाल और मुकेश अम्बानी का ज़िक्र आया। सूरमा जी बोले “सब के सब चोर हैं, मुकेश अम्बानी को देख लो, देश को नुकसान पहुंचाता है, जिसे हम देश का गौरव समझते थे वो ही चोर निकला।” मैंने भी पनीर खाते हुए अपनी सहमति जताई।

खाने के बाद चाय का सिलसिला शुरू हुआ, मैंने चाय की चुस्की के साथ सूरमा जी से पुछा “सूरमा जी ये तो बताइए दो दो एयर कंडीशनर का खर्चा कैसे उठाते हैं”|

सूरमा जी बड़े गर्व के साथ बोले “वो जी कुछ नहीं डॉक्टर साहब! बस शाम होते ही मीटर पर मैगनेट रख देते है, इलेक्ट्रॉनिक मीटर खुद-ब-खुद बंद हो जाता है।”

मेरी चाय ख़तम हो चुकी थी और मैं सूरमा जी के इन वचनों को सोचता हुआ उठा ” सब के सब चोर हैं”|
-imrankhan

Submitted on: Sat Jan 19 2013 01:52:18 GMT-0800 (PST)
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Proverb Tue Jan 15 2013 07:20:51 GMT+0530 (IST) -देवसुत


-1-
दूर के ढोल सुहावने लगते हैं ।
English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
The drums sounds better at a distance.

Equivalent English Proverb:
The grass looks greener on the other side.

-2-
घर की मुर्गी दाल बराबर ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
Self-possessions are never valued.

Equivalent English Proverbs:
Familiarity breeds contempt.
The grass looks greener on the other side.

-3-
घर का भेदी लंका ढाए ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
A traitor can fell the strongest bastion.

Equivalent English Proverb:
A spy is better than a thousand soldiers.

-4-
जल में रहकर मगर से बैर ठीक नहीं ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
Being enemies with the crocodile when living in water is not good.

-5-
गरजते बादल बरसते नहीं ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
Thundering clouds do not rain.

Equivalent English Proverb:
Empty cans make more noise.

-6-
जितनी लम्बी चादर हो उतने ही पैर फैलाने चाहिए ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
Stretch your legs only till where the blanket is.

Equivalent English Proverb:
Live within your means.

-7-
अधजल गगरी छलकत जाए ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
Half filled pot spills out water.

Equivalent English Proverb:
Empty cans make more noise.

-8-
अंधों में काणा राजा ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
A one-eyed man is king amongst blind men.

-9-
अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
Why repent now, when birds have already eaten the crop.

Equivalent English Proverb:
A stitch in time saves nine.

-10-
आप भला तो जग भला ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
If one is good, then the whole world is good.

-11-
अंत भला तो सब भला ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
If end is good, everything is good.

Equivalent English Proverb:
All’s well that ends well.

-11-
एक म्यान में दो तलवारें नहीं समातीं ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
Two swords cannot be in the same scabbard.

-12-
नाच न जाने आँगन टेढ़ा ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
Knows not how to dance, claims the stage is titled.

-13-
एक हाथ से ताली नहीं बजती ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
One hand cannot clap.

Equivalent English Proverb:
It takes two to quarrel.

-14-
ओखली में सर दिया तो मूसलों से क्या डरना ?

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
If the head has been put in the pounder, then why fear the pounding?

Equivalent English Proverb:
No guts, no glory.

-15-
ऊँट के मुंह में जीरा ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
Cumin seed in camel’s mouth

Equivalent English Proverb:
Too little, too late.

-16-
प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
What is seen (facts) needs no proof.

-17-
सर सलामत तो पगड़ी हज़ार ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
If the head is intact, a thousand turbans can be worn.

-18-
सौ सोनार की एक लोहार की ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
A single blow of a blacksmith (lohaar) is equal to a hundred blows of a goldsmith (sonaar).

-19-
सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
After eating a 100 mice, the cat goes for a pilgrimage.

-20-
सावन के अंधों को सब हरा ही हरा दिखाई देता है ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
One who goes blind in spring, sees only greenery all around.

-21-
जहाँ चाह वहाँ राह ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
The way can be made where you like it.

Equivalent English Proverb:
Where there is a will, there is a way.

-22-
चोर की दाढ़ी में तिनका ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
The thief has a straw in the beard.

-23-
काला अक्षर भैंस बराबर ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
For an illiterate black letters look the same as a buffalo.

-24-
अपना हाथ जगन्नाथ ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
My hand is God. (Power is in our hands).

-25-
आगे कूँआ पीछे खाई ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
Well in front, abyss behind.

Equivalent English Proverb:
Catch-22

-26-
ऊंची दुकान फीके पकवान ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
High standard store, tasteless food.

-27-
उल्टा चोर कोतवाल को डांटे ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
The thief blames back the cop.

-28-
एक अनार सौ बीमार ।

English Translation of Hindi Proverb (Kahavat):
One pomegranate, 100 sick. (same thing demanded by too many people)
Submitted by: देवसुत
Submitted on: Tue Jan 15 2013 07:20:51 GMT+0530 (IST)
Category: Proverb
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Proverb Thu Dec 27 2012 15:15:13 GMT+0530 (IST) -Simmi


-1-
बन्दर क्या जाने अद्रक का स्वाद.
-2-
अद्रक क्या जाने बन्दर का मिजाज़.
Submitted by: Simmi
Submitted on: Thu Dec 27 2012 15:15:13 GMT+0530 (IST)
Category: Proverb
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Proverb Sat Dec 01 2012 22:00:56 GMT+0530 (IST) -देवसुत


राम बनाए जोड़ी, एक अँधा एक कोढ़ी |

Submitted by: देवसुत
Submitted on: Sat Dec 01 2012 22:00:56 GMT+0530 (IST)
Category: Proverb
Language: Hindi
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बदतमीज़ ! -देवसुत Tue Nov 27 2012 08:52:37 GMT-0800 (PST)


बदतमीज़ !
खद्दर की कमीज़,
लोहे का पजामा,
बन्दर तेरा मामा |

(बाल कविता – Children’s Poem)
Submitted by: देवसुत
Submitted on: Sun Nov 25 2012 02:41:19 GMT-0800 (PST)
Category: Folklore
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Proverb Sun Aug 12 2012 21:49:57 GMT+0530 (IST) -Deepa


आलसी गए कुँए में, तो छः महीने ऊपर नहीं

Submitted by: Deepa
Submitted on: Sun Aug 12 2012 21:49:57 GMT+0530 (IST)
Category: Proverb
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दिल की हम क्या बयाँ करें… -हरेकृष्ण आचार् य Fri Oct 05 2012 10:43:35 GMT-0700 (PDT)


दिल की हम क्या बयाँ करें, अब तो दिमाग में भी सन्नाटा है,
देश तो कब का बाँट दिया, अब तो गली-गली में बंटवारा है|

देश की हम क्या बात करें, जब दिल्ली ही में अंधियारा है,
आम आदमी को तो कब का बेच खाया, अब तो हर आदमी बेचारा है |

दिल की हम क्या बयाँ करें, अब तो दिमाग में भी सन्नाटा है…

कश्मीर की हम क्या बात करें, अब तो आसाम में भी हो-हल्ला है,
झारखण्ड की हम क्या बात करें, जब केरल में कश्मीर होने वाला है|

नेत्रत्व की हम क्या बात करें, जब हर नेता हत्यारा है,
भूख से ह्त्या करना, इन्हें जनम जनम से आता है |

दिल की हम क्या बयाँ करें, अब तो दिमाग में भी सन्नाटा है…

बड़ों की हम क्या बात करें, अब तो बच्चों में भी बंटवारा है,
जब कक्षाओं में प्रवेश जाती-धर्म पर हो, तो और किस चीज़ की हमें आशा है|

दुश्मनों की हम क्या बात करें, जब अपनों ही ने छुरा दिखाया है,
दुश्मनों से प्यार और अपनों पर हमले की जब बात हो, तो क्या ऐसे नेत्रत्व पर हमे भरोसा है?

दिल की हम क्या बयाँ करें, अब तो दिमाग में भी सन्नाटा है…

आतंक की हम क्या बात करें, जब अपनों ही ने हमसे हफ्ता उठाया है,
जहाँ हफ्ता देने वाला ही ज़ुल्मी कहलाये, उस व्यवस्था पर आम आदमी का क्या भरोसा है?

दूसरों की हम क्यों बात करें, जब आज तक, इन सब बातों से, हम ही ने मुंह फेरा है,
कहाँ भीष्म, कृष्ण, अशोक, अकबर का भारत, अब क्या यही भारत मेरा है?

दिल की हम क्या बयाँ करें, अब तो दिमाग में भी सन्नाटा है|
-हरेकृष्ण आचार्य

Submitted on: Fri Sep 21 2012 11:52:55 GMT-0700 (PDT)
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Folklore Quote, Fri Sep 21 2012 23:01:31 GMT+0530 (IST) -बुआजी


धोबी का कुत्ता, न घर का, न घाट का |

Submitted by: बुआजी
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Category: Folklore
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Folklore Quote, Fri Sep 21 2012 23:00:03 GMT+0530 (IST) -बुआजी


तवा कहे कड़ाही को, “तू काला”|

Submitted by: बुआजी
Submitted on: Fri Sep 21 2012 23:00:03 GMT+0530 (IST)
Category: Folklore
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ऊंची उड़ान – हरेकृष्ण आचार्य Sun Sep 23 2012 02:51:57 GMT-0700 (P DT)


पैरों को ज़मीं पर रखकर
तारों को छूने की कोशिश करना
कोई बुरी बात तो नहीं है,
लेकिन,
तारों को छूने के लिए,
ऊंची उड़ान की ज़रुरत पड़ती है |

माना,
माना की तारे ऊंची उड़ान से भी नहीं मिलते,
पर,
पैरों को ज़मीं पर रख कर भी,
कुछ हासिल नहीं होता |
– हरेकृष्ण आचार्य

Submitted on: Sun Sep 23 2012 02:06:26 GMT-0700 (PDT)
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Proverb Sun Aug 12 2012 19:25:42 GMT+0530 (IST) -Devapriya


बहू करे काम, बेटी का हो नाम !

Submitted by: Devapriya
Submitted on: Sun Aug 12 2012 19:25:42 GMT+0530 (IST)
Category: Proverb
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Proverb Sun Aug 12 2012 19:19:48 GMT+0530 (IST) -Devapriya


जान जाए पर ईमान न जाए |

Submitted by: Devapriya
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Proverb Fri Aug 10 2012 20:19:43 GMT+0530 (IST) -Devapriya


बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद

Submitted by: Devapriya
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Proverb Fri Aug 10 2012 21:16:18 GMT+0530 (IST) -Devapriya


लोहे का चना चबाना |

Submitted by: Devapriya
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Proverb Fri Aug 10 2012 21:13:14 GMT+0530 (IST) -Devapriya


ऊँट के मुह में जीरा |

Submitted by: Devapriya
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Original Quote, Sun Aug 05 2012 11:57:03 GMT+0530 (IST) -Devapriya


कोयल का सुर कव्वा गाये |

-Devapriya

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Non-original work with Acknowledgements Quote, Thu Aug 09 2012 22:29:39 GMT+0530 (IST) -Devapriya


नीचे नंगा सिर पर पगड़ी

– श्री अरुण कुमार हेगड़े, बी.जे.पी. एम्.पी.
(लोक सभा में दि.९.८.२०१२ को दिया हुआ भाषण का एक वाक्य)
-Devapriya

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Proverb Sun Aug 05 2012 12:33:17 GMT+0530 (IST) -Deepa


नाच न जाने आँगन टेढ़ा |

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Proverb Sun Aug 05 2012 07:44:54 GMT+0530 (IST) -Devapriya


खाने को मै, लड़ने को मेरे भैया |

Submitted by: Devapriya
Submitted on: Sun Aug 05 2012 07:44:54 GMT+0530 (IST)
Category: Proverb
Language: Hindi
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Proverb Sun Aug 05 2012 12:05:02 GMT+0530 (IST) -Deepa


कव्वा चला हंस की चाल !

Submitted by: Deepa
Submitted on: Sun Aug 05 2012 12:05:02 GMT+0530 (IST)
Category: Proverb
Language: Hindi
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Proverb Fri Jun 15 2012 09:43:11 GMT+0530 (IST) -मुक्ति


महलों और झुग्गियों में, बारह खून माफ़ |

Submitted by: मुक्ति
Submitted on: Fri Jun 15 2012 09:43:11 GMT+0530 (IST)
Category: Proverb
Language: Hindi
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महाबंदर -देवसुत


मैं महा बंदर

मुझे पूँछ नहीं है, पर मूंछ है
शक्ति नहीं है पर दिमाग है
ऐसा मैं सोचता हूँ|

मैं एक पेड़ से दुसरे पेड़ कूदना नहीं जानता
और न ही अब कोई पेड़ बचे हैं मुझे कूदने के लिए
और हाँ, मैं दो पाँव पे ही नहीं, सीधा भी चलता हूँ
अभी तक|

मैं सब कुछ खाता हूँ,
केला ही नहीं, करेला भी, भेड़ ही नहीं, बन्दर भी,
मछली ही नहीं, मगरमच्छ भी,
सूअर ही नहीं, गाय भी|

मैं गाय-भैंस भी पालता हूँ,
गाय का दूध पीकर बड़ा होता हूँ,
बड़ा हो कर,
उसी बुढ़ियाई गाय को बेचकर, पैसे गिनता हूँ|

मैं कपडे पहनता हूँ, और जूते भी,
कपड़े, रेशम के कीड़ों को उबाल कर,
जूते, भैंस के चमड़े को उधाड कर,
आखिर सूत के कपड़ों में, रेशम की चमक कहाँ?

में गाड़ी भी चलाता हूँ, और कुत्ते भी पालता हूँ,
कुत्ते होते हैं बहुत वफादार,
पर गाड़ी के सामने आये कुत्तों को, रौंद डालता हूँ,
साले कुत्ते !

मैं महाबंदर,
मुझे दोस्त चाहिए, पर दोस्ती नहीं,
मुझे पैसे चाहिए, पर काम नहीं,
मुझे गद्दी चाहिए, पर ज़िम्मेदारी नहीं,

मुझमे इतने गुण हैं,
इसीलिए तो हूँ मैं और सिर्फ मैं,
महाबंदर|
-देवसुत

Submitted on: Fri Dec 23 2011 06:05:05 GMT-0800 (PST)
Category: Original
Language: Hindi
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काश… मैं पीछे होता -देवसुत


काश… मैं पीछे होता

काश… मैं पीछे होता,
आँखें खोल कर नहीं, बंद करके सोता,
किताब खोल के नहीं, बंद करके रखता,
टीचर से नहीं, दोस्तों से बातें करता,
पेन से किताब पर नहीं, चोक से टेबल पर लिखता,
अक्षर कम और फिगर ज्यादा बनाता,
आगे नहीं, अगल-बगल ज्यादा देखता,
टीचर की नज़रों में बुरा होता तो क्या,
दोस्तों की नज़रों में तो अच्छा होता?
शायद ज़िन्दगी का लुत्फ़ ज्यादा उठाता,
क्योंकि पढ़ाई की जगह, मगज मारी ज़्यादा करता,
और शायद आज जहां हूँ, वहां नहीं होता,
पर क्या मैं कुछ ऊपर? या शायद कुछ नीचे ही होता!

-देवसुत

Submitted on: Wed Dec 07 2011 06:49:08 GMT-0800 (PST)
Category: Original
Language: Hindi
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Proverb Tue Nov 15 2011 13:35:21 GMT+0530 (IST) -देवसुत


करत-करत अभ्यास ते, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत जात ते, सिल पर परत निसान।।
-कबीरदास

अर्थात: निरन्तर अभ्यास से कठिन से कठिन लक्ष्य की भी प्राप्ति की जा सकती है।

Translation:
With constant practice, even a fool can become learned.
As a rope can mark a stone by constant abrasion.

-देवसुत

Submitted on: Tue Nov 15 2011 13:35:21 GMT+0530 (IST)
Category: Proverb
Language: Hindi
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Proverb Tue Nov 15 2011 07:49:24 GMT+0530 (IST) -देवसुत


काल करय सो आज कर, आज करय सो अब, पल मे परलय होएगी, बहुरि करेगा कब|
-कबीरदास
-देवसुत

Submitted on: Tue Nov 15 2011 07:49:24 GMT+0530 (IST)
Category: Proverb
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हमारे नन्हे कदम -हरेकृष्ण आचार्य


हमारे नन्हे कदम

समय की रेत पे,
चले जा रहें हैं
हमारे नन्हे कदम|

ज़िन्दगी की आंधी में ,
अपने मिटते चिन्हों को,
देख कर हँसते हुए,
कदम कदम पर,
अगले कदम के बारे में सोचते हुए,
चले जा रहें हैं,
हमारे नन्हे कदम|

नन्हे कदमों से लम्बे रास्ते साधते हुए,
अपनी आकांक्षा तारों पे लगाते हुए,
ज़िन्दगी के अगले मोड़ के इंतज़ार में,
ज़िन्दगी सँभालते हुए,
यही हैं वो नन्हे कदम|

कुछ नन्हे कदम, कुछ लम्बे रास्ते,
कुछ टूटे हौंसले, कुछ बुलंद इरादे,
बुलंद इरादों से सधते लम्बे रास्ते,
तारों को हासिल करते,
हमारे यही,
छोटे से,
नन्हे कदम|

-हरेकृष्ण आचार्य
First penned on: 1st August 2002 A.D., 18.56 hrs.
-हरेकृष्ण आचार्य

Submitted on: Wed Oct 12 2011 02:33:58 GMT-0700 (PDT)
Category: Original
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