क्यों हैं यह रास्ते संकरे ?
क्यों हैं यहाँ बाबू अंधे ?
क्यों हैं यहाँ लोग प्यासे मरते ?
जब बाँध हैं पानी से फूटते ?

कहते हैं शहर में पानी कम है
पर फिर गगन-चुम्भी बनाते क्यों हैं ?
ढक देते हैं क्यों ज़मीं को सीमेंट से?
तालाबों को क्यों भर देते ?

पानी कम नहीं स्वार्थ ज़्यादा है
तालाब से ज़्यादा ज़मीन में फायदा है
फ्लैट बनाएंगे और पानी बेचेंगे
और हम?
फ्लैट में रहेंगे और प्यास से मरेंगे ।

-हरेकृष्ण आचार्य
Penned: 15-6-2010
हरेकृष्ण आचार्य

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Submitted by: हरेकृष्ण आचार्य
Submitted on: Sat Mar 05 2016 09:02:50 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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