हमें कितना प्रेम दिया जब हम छोटे थे
तब नही थी आपको मुझसे आस
आज क्योँ बदल गए आप
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास

क्या रिश्तों का आँगन ऐसे ही सिमटेगा
अपनों का दामन बस धन में लिपटेगा
क्योँ नही रहा आपको अपनेपन का एहसास
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास

क्या धन के लिए मैं कहीं डाका डालूं
कोई घोटाला कर डालूं
अपने को बेच खुद नई नजर में बना डालूं अपना उपहास
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास

धन से ख़ुशी नही मिलती अप्पा
संतोष बड़ा धन है
सबसे बड़ा धन है आस
क्योँ बढ़ गयी धन की प्यास
Amar

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Submitted by: Amar
Submitted on: Wed Feb 17 2016 10:59:34 GMT+0530 (IST)
Category: Original
Language: हिन्दी/Hindi

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